डिजिटल डेस्क, 08 मई 2026
केंद्रीय खेल मंत्री ‘बिचारपुर’ के फुटबॉल जुनून को सराहा।
नई दिल्ली: केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने जमीनी स्तर पर खेलों के बढ़ते प्रभाव और सामाजिक बदलाव पर गहरा भरोसा जताया है। दिल्ली में आयोजित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘बिचारपुर – जुनून फुटबॉल का’ की विशेष स्क्रीनिंग के दौरान उन्होंने कहा कि खेल अब केवल मैदान की हार-जीत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये समाज को एक सूत्र में पिरोने और युवाओं को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम बन चुके हैं।
फिल्म देखने के बाद अपने संबोधन में डॉ. मांडविया ने पुरानी यादें साझा करते हुए कहा कि करीब 25 साल पहले जो युवा गलत रास्तों पर भटक रहे थे, खेल ने उनका जीवन पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि खेल से अनुशासन, मानसिक मजबूती और टीम भावना पैदा होती है, जो युवाओं को एक जिम्मेदार नागरिक और नेता के रूप में तैयार करती है।
मंत्री जी ने कर्नाटक के कूर्ग (कोडवा समुदाय) की हॉकी संस्कृति का जिक्र करते हुए बताया कि जब समाज खुद खेल अभियानों का नेतृत्व करता है, तो उससे राष्ट्र के प्रति गौरव और आपसी भाईचारे की भावना बढ़ती है। उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी भले ही निजी उपलब्धि के लिए खेलता हो, लेकिन उसका हर प्रयास अंततः तिरंगे की शान बढ़ाता है।
डॉक्यूमेंटेशन और सम्मान पर जोर
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि खेल जगत की ऐसी प्रेरक कहानियों का दस्तावेजीकरण (Documentation) होना बेहद जरूरी है। जब किसी संघर्ष और सफलता को फिल्म या लेख के जरिए सहेजा जाता है, तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन जाता है। साथ ही, उन्होंने स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं को सम्मानित करने की बात कही, ताकि युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ सके।
जनचौपाल-36
“…मंत्री जी ने कूर्ग के कोडवा समुदाय का उदाहरण दिया, लेकिन हमारे छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में भी फुटबॉल का ऐसा ही जुनून देखा जाता है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक, मैदानों में युवाओं की ऊर्जा देखते ही बनती है। रायपुर के मैदानों में तो हमने कई बार गार्जियन के साथ फुटबॉल मैच देखे हैं, जहाँ खिलाड़ियों का उत्साह किसी अंतरराष्ट्रीय मैच से कम नहीं होता। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि हमारे स्थानीय खिलाड़ियों को सही मंच मिले, तो वे देश का नाम रोशन कर सकते हैं।”
भारत खेलों का देश-खेलों से बदलेगी समाज की सूरत: खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया


