डिजिटल डेस्क-19/04/2024
देशभर में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे तेजी से बढ़ रहे अवैध ढाबों, अस्थायी दुकानों और अतिक्रमण पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 60 दिनों के भीतर ऐसे अवैध निर्माण हटाने के निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और आम नागरिकों की जान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और किसी भी तरह का अनधिकृत ढांचा इन उद्देश्यों के विपरीत है। कोर्ट ने राज्य सरकारों, स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग को समन्वय बनाकर अभियान चलाने को कहा है, ताकि तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि राजमार्गों के किनारे बिना अनुमति संचालित ढाबे और दुकानें न केवल सड़क की चौड़ाई को प्रभावित करती हैं, बल्कि वाहन चालकों के लिए अचानक रुकने, गलत पार्किंग और भीड़भाड़ जैसी समस्याएं पैदा करती हैं। इससे दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जहां आवश्यक हो, वहां वैकल्पिक स्थान चिन्हित कर वैध रूप से व्यवसाय करने की व्यवस्था भी की जा सकती है, लेकिन अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।
यह निर्देश देने के पीछे मुख्य कारण देश में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं और उनमें होने वाली मौतें हैं। कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि हाइवे किनारे अनियंत्रित ढाबों के कारण वाहन चालकों का ध्यान भटकता है, अचानक वाहन मोड़ने या रोकने की स्थिति बनती है और भारी वाहनों के साथ टकराव जैसी घटनाएं होती हैं। इसके अलावा, आपातकालीन सेवाओं—जैसे एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड—को भी अतिक्रमण के कारण रास्ता साफ नहीं मिल पाता, जिससे समय पर मदद पहुंचाने में बाधा आती है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि कई जगहों पर ये ढाबे बिना किसी सुरक्षा मानकों के संचालित होते हैं, जहां पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं होती और न ही यातायात नियमों का पालन किया जाता है। इससे सड़क पर अव्यवस्था और जोखिम दोनों बढ़ते हैं। अदालत ने राज्यों को निर्देश दिया है कि भविष्य में इस तरह के अतिक्रमण को रोकने के लिए नियमित निगरानी तंत्र विकसित किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
कुल मिलाकर, कोर्ट का यह आदेश सड़क सुरक्षा को मजबूत करने, दुर्घटनाओं में कमी लाने और राजमार्गों को व्यवस्थित व सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है


