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Friday, June 5, 2026

एबीवीपी/एनएसयूआई आमने सामने:RSS कार्यक्रम पर बवाल राजस्थान यूनिवर्सिटी में लाठीचार्ज, NSUI कार्यकर्ता हिरासत में

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डिजिटल डेस्क/जयपुर, 04 अप्रैल 2026

राजस्थान यूनिवर्सिटी परिसर शनिवार को एक बार फिर राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “प्रबुद्ध जन संवाद एवं सांगठनिक विस्तार” कार्यक्रम के विरोध में कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI ने प्रदर्शन किया, जो देखते-देखते हिंसक हो गया। पुलिस को हल्का बल प्रयोग के साथ लाठीचार्ज करना पड़ा और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।खबर है कि ABVP और NSUI कार्यकर्ता भी आमने-सामने आ गए, जिससे तनाव और बढ़ गया। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर थाने भेजा और परिसर में भारी पुलिस बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रण में लिया।

कार्यक्रम क्या था और क्यों हुआ विरोध?
विश्वविद्यालय के संविधान पार्क में RSS का “मातृशक्ति संवाद कार्यक्रम” प्रस्तावित था। RSS नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रम शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित करता है, जिसका उद्देश्य युवाओं और बुद्धिजीवियों से संवाद तथा सांगठनिक विस्तार बताया जाता है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति दी थी।

NSUI ने इसका कड़ा विरोध किया। संगठन का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार शैक्षणिक संस्थानों का भगवाकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। NSUI का कहना है कि विश्वविद्यालय शिक्षा और शोध का केंद्र है, न कि किसी विशेष विचारधारा के प्रचार का मंच।

कैसे बिगड़े हालात?
प्रदर्शन के दौरान NSUI कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार की ओर बढ़े। पहले से तैनात पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई और पुलिस को हल्का बल प्रयोग करते हुए लाठियाँ भाँजनी पड़ीं। कुछ छात्रों को मामूली चोटें आईं।

दोनों पक्षों की दलील
NSUI का तर्क है कि शांतिपूर्ण विरोध उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और किसी भी राजनीतिक-वैचारिक संगठन को विश्वविद्यालय परिसर में प्रचार का मंच नहीं मिलना चाहिए — चाहे वह कोई भी हो।

दूसरी ओर ABVP और RSS समर्थकों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुमति प्राप्त कार्यक्रम को बलपूर्वक रोकना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विरुद्ध है। बैरिकेड तोड़ना किसी भी विरोध को अनुचित ठहराता है।1

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