34.4 C
Raipur
Saturday, March 7, 2026

टैगोर, विवेकानंद, बोस: बंगाल चुनाव 2026 और SIR—देश की असली तस्वीर उजागर करेगा

Must read

बंगाल के नायकों से SIR तक एकता का संदेश।

संपादकीय लेखनजनचौपाल_36.कॉम /02/01/2026

पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव न केवल राज्य की राजनीति का फैसला करेंगे, बल्कि देश की एकता-अखंडता की सच्ची परीक्षा भी सिद्ध होंगे। यहां अलगाववाद, नक्सलवाद, घुसपैठ,आतंकवाद और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) विरोधी विचार अभी भी सांस ले रहे हैं। मीडिया में कभी टीएमसी का हिंदुत्व-विरोधी चेहरा उभरता है, तो कभी घुसपैठ और अलगाववाद के संकेत नजर आते हैं। क्या सभी राज्यों को भारत की संप्रभुता और अखंडता को सर्वोपरि रखने की आवश्यकता नहीं? लोकतंत्र देश की धड़कन है और वोटर उसकी सांसें—फिर घुसपैठ और अलगाववाद के विचारों को पनपने क्यों दिया जाए?

केवाईसी बनाम एसआईआर
देश का संविधान और सम्मान किसी राज्य के लिए वैकल्पिक नहीं हो सकता। बंगाल में अलग संविधान या सम्मान की मांग क्यों? हमारा मानना है कि SIR गलत नहीं—यह मतदाताओं की राष्ट्रीय पहचान सुनिश्चित करने का माध्यम है। प्रजातंत्र में KYC का हिस्सा बन चुका SIR अपनाने वाला ही सच्चा नागरिक और असली मतदाता है। सरकार यदि घुसपैठियों की पहचान करे, तो इसमें बुराई क्या? भीड़तंत्र में घुसपैठियों को बाहर करना जरूरी है। भारत में वोट का अधिकार पाने वाला ही सच्चा नागरिक है, जो देशहित सोच सकता है। संख्या पर आधारित तुष्टिकरण ने हमेशा लोकतंत्र को कमजोर किया है। मेहमान को जान से प्यारा मानें, लेकिन क्या वह वास्तविक है? क्या वह हमारी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचाएगा? आज पहचान की घड़ी है।

बांग्लादेश की छाया और राजनीतिक रणनीतियां

बांग्लादेश की अस्थिर राजनीति बंगाल की सीमाओं पर साया डाल रही है। अब नजर डालें चार प्रमुख बिंदुओं पर:

पहला: अमित शाह की चुनावी रणनीति
गृह मंत्री अमित शाह ने दिलीप घोष, शमिक भट्टाचार्य, सुवेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार से अलग मंत्रणा की। ये बंगाल भाजपा के चार स्तंभ हैं। घोष की वापसी संशय भंग करने वाली है, जो पार्टी की आंतरिक राजनीति को मजबूत करेगी।

दूसरा: दिलीप घोष की पुनरागमन
पिछले साल ममता बनर्जी से मुलाकात पर अफवाहें उड़ीं, लेकिन घोष ने इसे प्रचार बताया। उनकी सक्रियता भाजपा को जमीन पर मजबूत करेगी।

तीसरा: अभिषेक बनर्जी का विपक्ष पर प्रहार
टीएमसी महासचिव अभिषेक ने चुनाव आयोग बैठक के बाद कांग्रेस पर निशाना साधा। हरियाणा चुनाव का हवाला देकर उन्होंने राहुल गांधी की सोशल मीडिया रणनीति पर सवाल उठाए—चुनाव बूथ-लेवल संगठन से जीते जाते हैं, न कोई स्क्रिप्ट से। अधीर रंजन चौधरी ने भी टीएमसी पर वोटर लिस्ट गड़बड़ी और SIR को वोट चोरी का हथियार बताया। पंचायत चुनावों में हत्याओं का जिक्र कर उन्होंने ममता की ‘डराओ-बचाओ’ रणनीति उजागर की। चौधरी की मोदी मुलाकात के बाद आक्रामकता इंडिया गठबंधन में दरार डाल रही है—क्या कांग्रेस अकेले लड़ेगी?

चौथा: विवेकानंद का राष्ट्रवाद
अमित शाह के शब्दों में, विवेकानंद के सपनों का भारत बंगाल से बनेगा। स्वाधीनता संग्राम में बंगाल की भूमिका ऐतिहासिक रही, भले बोस-कांग्रेस की दूरी हो। हिंदुत्व का राष्ट्रवाद अब चुनावी धुरी बनेगा।

बंगाल चुनाव देश को संदेश देगा—एकता या असंगठित विचार? सच्चे नागरिक चुनेंगे

- Advertisement -spot_img

More articles

- Advertisement -spot_img

Latest article