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Friday, June 5, 2026

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहुंचे ग़लगम जवानों का बढ़ाया हौसला कहा,,बस्तर में सुशासन लाना है

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गलगम पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जवानों का हौसला बढ़ाया मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमें सरकार में आए डेढ़ साल हुए हैं और इस अवधि में हमने राज्य में सुशासन स्थापित करने का प्रयास किया है।

रायपुरमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज बीजापुर जिले के उसूर तहसील के अंदरूनी गांव गलगम पहुंचे, जहाँ उन्होंने सीआरपीएफ के जवानों और स्थानीय ग्रामीणों से मुलाकात कर हालिया नक्सल विरोधी अभियान की सफलता पर चर्चा की। इस अभियान में सुरक्षा बलों ने करेगुट्टा की पहाड़ी पर 21 दिनों तक चले ऑपरेशन में 31 कुख्यात माओवादी आतंकियों को मार गिराया और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए।

मुख्यमंत्री साय ने इस अभियान को नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बताया। मुख्यमंत्री श्री साय ने भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी के जयकारे के उद्बोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों ने अदम्य साहस और समर्पण के साथ इस
ऑपरेशन को सफल बनाया है। यह न केवल बीजापुर बल्कि पूरे राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

गलगम और करेगुट्टा का क्षेत्र लंबे समय से नक्सलियों का गढ़ माना जाता रहा है और इस अभियान ने इस इलाके को सुरक्षित बनाने की दिशा में नई उम्मीद जगाई है। सीआरपीएफ जवानों से मुलाकात के दौरान साय ने उनके साहस की सराहना की और कहा कि आपके शौर्य और निष्ठा से ही हम नक्सलवाद के खिलाफ इस लड़ाई को
जीत रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने जवानों के साथ तस्वीर खिंचाई और भारत माता के जयकारे से उनका जोश बढ़ाया। उन्होंने जवानों संग बैठकर भोजन भी किया। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम और कलेक्टर बीजापुर संबित मिश्रा सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी और सुरक्षा बलों के जवान उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री द्वारा नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ बना कर बस्तर को विकास की दिशा में जोड़ने के महत्वपूर्ण प्वॉइंट

नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़: मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य है, जिसमें सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदायों का सहयोग जरूरी है।
सुविधा कैम्प: सुरक्षा कैम्प के माध्यम से सुदूर इलाकों में सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
विकास कार्य: क्षेत्र में सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा, ताकि ग्रामीण मुख्यधारा से जुड़ सकें।
शिक्षा और स्वास्थ्य: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।


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