रायपुर (छत्तीसगढ़) दिनांक 24.10.2026
शराब के दुष्परिणाम सरकार बेखबर
वरिष्ठ चिकित्सकों के कथनानुसार छत्तीसगढ़ के नकली शराब से वेस्कुलर नेक्रोसिस की समस्या शराब सेवन करने वालों में अत्यधिक बढ़ रही है जिस कारण छत्तीसगढ़ में शराब के बढ़ते सेवन से मानव हड्डियों पर खतरा।
पूर्व संसदीय सचिव एवं छाया सांसद विकास उपाध्याय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के राज में पहले शराब के ओवर रेट और नकली हॉलमार्क को लेकर लगातार शिकायतें आई और पुलिसिया कार्रवाई भी हुई लेकिन अब हद हो गई जब नकली शराब से मानव जीवन से खिलवाड़ करने की बातें सामने आ रही है शराब बनाने में ऐसे पदार्थ का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे शराब सेवन करने वालों के शारीरिक स्थिति बत से बत्तर होने वाली है सीधे-सीधे उनके रीढ़ की हड्डी में फर्क पड़ने वाला है।
सरकार की आबकारी नीति पर उठाए सवाल,शराब के नाम पर राजस्व वसूली बंद करे सरकार, जनता के स्वास्थ्य की भी ले जिम्मेदारी।
शराब के बढ़ते सेवन और उससे होने वाले गंभीर स्वास्थ्य नुकसान को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए विकास उपाध्याय ने कहा कि शराब का अत्यधिक सेवन केवल परिवारों को आर्थिक और सामाजिक रूप से बर्बाद नहीं करता, बल्कि शरीर की हड्डियों को भी कमजोर कर सकता है।
शराब के दुष्परिणामों पर सरकार मौन क्यों, जनता के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?
वरिष्ठ चिकित्सकों के कथनानुसार लंबे समय तक अधिक शराब पीने से हड्डियों का घनत्व कम होता है एवं ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार को केवल शराब से मिलने वाले राजस्व की चिंता करने के बजाय आम जनता के स्वास्थ्य की भी चिंता करनी चाहिए।
शराब की कमाई या जनता की सेहत – सरकार को चुनना होगा अपना दायित्व।
उन्होंने कहा कि “सरकार का काम जनता को स्वस्थ रखना है, न कि शराब की कमाई के आगे लोगों की सेहत को नजरअंदाज करना।” यदि शराब के दुष्परिणामों से परिवार उजड़ रहे हैं और लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, तो सरकार को अपनी आबकारी नीति की समीक्षा करनी चाहिए। शराब की उपलब्धता और बिक्री से होने वाली कमाई का हिसाब देने वाली सरकार को यह भी बताना चाहिए कि शराब से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
शराब से राजस्व की मलाई खा रही सरकार, जनता की हड्डियां कमजोर होने के खतरे पर कौन देगा जवाब?
विकास उपाध्याय ने कहा कि शराब के अत्यधिक सेवन से शरीर में कैल्शियम और विटामिन-डी के संतुलन, हड्डियों के निर्माण तथा गिरने से चोट लगने के जोखिम पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कमर और रीढ़ की हड्डी में दर्द या कमजोरी को नजरअंदाज करना भी खतरनाक हो सकता है। हालांकि, कमर की हड्डी की हर बीमारी शराब के कारण नहीं होती; इसके लिए चिकित्सकीय जांच आवश्यक है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि शराब के दुष्प्रभावों के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, नशामुक्ति सेवाओं को मजबूत किया जाए तथा शराब की लत से जूझ रहे लोगों को उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जनता की सेहत की कीमत पर राजस्व कमाने की सोच स्वीकार्य नहीं है। सरकार को शराब के दुष्परिणामों पर गंभीरता से काम करना होगा, अन्यथा जनता के स्वास्थ्य से जुड़े इन सवालों का जवाब देना पड़ेगा।
