नई दिल्ली:_ 06/12/2025
दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ व्यापक सहयोग को और मज़बूत करने का संकल्प दोहराया। बैठक के दौरान भारत और रूस ने कई महत्वपूर्ण समझौतों का आदान-प्रदान किया और आतंकवाद, उग्रवाद, संगठित अपराध, धनशोधन और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने पर जोर दिया।
दोनों नेताओं ने कहा कि आतंकवाद “धार्मिक या वैचारिक बहानों” में छिपकर आए—तब भी किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। इसी क्रम में भारत और रूस ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले और 2024 में मॉस्को के क्रोकस सिटी हॉल हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने अल-कायदा, आईएसआईएस/दाएश सहित सभी संयुक्त राष्ट्र सूचीबद्ध आतंकी संगठनों पर कठोर कार्रवाई की जरूरत पर बल दिया—जिसमें आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों का सफाया, कट्टरपंथ के प्रसार पर रोक और वित्तपोषण नेटवर्क ध्वस्त करना शामिल है।
दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा के प्रासंगिक प्रस्तावों के “दृढ़ और संतुलित” क्रियान्वयन की वकालत करते हुए कहा कि आतंकवाद पर शून्य-सहिष्णुता नीति ही वैश्विक सुरक्षा का रास्ता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आतंकवाद का मुकाबला करने की प्राथमिक जिम्मेदारी संप्रभु राष्ट्रों की एजेंसियों पर है और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।
भारत और रूस ने 2022 में भारत की अध्यक्षता में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद रोधी समिति (CTC) की विशेष बैठक और दिल्ली घोषणा-पत्र का स्वागत किया—जो डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया, ऑनलाइन फंडिंग तकनीक और ड्रोन जैसी नई तकनीकों के आतंकवादी दुरुपयोग पर रोक लगाने से संबंधित प्रमुख चिंताओं को संबोधित करता है। दोनों देशों ने ऑनलाइन कट्टरपंथ रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने तथा एससीओ और ब्रिक्स के तहत जारी प्रगति पर संतोष जताया।


