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Saturday, March 7, 2026
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#स्व चिंतन

चेतना का श्रृंगार नहीं: पूर्णिमा के प्रकाश में साक्षी भाव का रहस्य

श्रृंगार तो जड़ का होता है चेतना का नहीं,चेतना ही ईश्वर का स्वरूप है: कार्तिक पूर्णिमा विशेष/लेख चेतना का श्रृंगार कोई नहीं कर सकता, क्योंकि चेतना...

योग दीपावली का सार:_योग और चेतना के अद्वैत संबंध

यदि हम संसार को प्रकाशित करने की बजाय स्वयं प्रकाशवान बन जाएँ, तो संसार स्वतः प्रकाशित हो जाएगा। दीवाली विशेष/ जनचौपाल36 /21/10/2025 योग के अभाव में...

✍️ दीप दृष्टा – आत्मसंवाद में खोया एक साधक🧘

साधना जब अभिनय से मुक्त होती है,तब ही आत्मसंवाद की शुरूआत होती है। चिंतन लेख | जनचौपाल 36)वह मौन था, लेकिन मौन नहीं था।वह खोया...

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