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Saturday, March 7, 2026
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#आत्मचिंतन

चेतना का श्रृंगार नहीं: पूर्णिमा के प्रकाश में साक्षी भाव का रहस्य

श्रृंगार तो जड़ का होता है चेतना का नहीं,चेतना ही ईश्वर का स्वरूप है: कार्तिक पूर्णिमा विशेष/लेख चेतना का श्रृंगार कोई नहीं कर सकता, क्योंकि चेतना...

✍️ दीप दृष्टा – आत्मसंवाद में खोया एक साधक🧘

साधना जब अभिनय से मुक्त होती है,तब ही आत्मसंवाद की शुरूआत होती है। चिंतन लेख | जनचौपाल 36)वह मौन था, लेकिन मौन नहीं था।वह खोया...

मौत एक कविता, जिंदगी एक कहानी: जीवन एक अंतर्यात्रा

जीवन है जगत है, माया है प्रकाश है,, अंधकार है,जन्म है मृत्यु है पर, यह सब क्यों है?? मनुष्य क्या यही सब देखने अनुभव...

अध्यात्म गहरी चेतना!!कर्ता कौन? — मोक्ष का सच्चा मार्ग क्या..?

हम केवल जीवन के बारे में सोचें"? बस जीवन के आनंद के बारे में सोचें"? पर मोक्ष के बारे में बिल्कुल ना सोचे तो...

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