यदि हम संसार को प्रकाशित करने की बजाय स्वयं प्रकाशवान बन जाएँ, तो संसार स्वतः प्रकाशित हो जाएगा।
दीवाली विशेष/ जनचौपाल36 /21/10/2025
योग के अभाव में...
"श्रद्धा और बंधन: मृत्यु के बाद भी मोह क्यों?"
स्वलेख 12।09।2025
आज का चिंतन यथार्थ के एक अद्भुत मोड़ पर है —जहाँ "मृत्यु", "प्रियता", "चेतना", "भक्ति"...