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Wednesday, October 28, 2026
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✊ भारतीय मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल छत्तीसगढ़ ✍️रायगढ़ जिला अध्यक्ष पद पर कामरेड विमल चौधरी की नियुक्ति✊

✊यदि संगठन नियोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच संतुलित व न्यायपूर्ण संबंध स्थापित कर पाए, तो यह केवल संगठन ही नहीं बल्कि उद्योग और देश की उन्नति के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा।

जनचौपाल36__29 अगस्त 2025 रायगढ़ /छत्तीसगढ़

रायगढ़।
गणेश चतुर्थी (27 अगस्त 2025) के पावन दिन पर भारतीय मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल प्रदेश अध्यक्ष बृजेश शर्मा ने कामरेड विमल चौधरी को रायगढ़ जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी।

🎯 कौन हैं कामरेड विमल चौधरी?
छात्र राजनीति से निकले जुझारू नेता।
पालूराम धनानिया महाविद्यालय के इतिहास में रिकॉर्ड तोड़कर छात्र संघ अध्यक्ष बने।
कॉलेज भवन निर्माण की लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाया।
समाज और मीडिया मंचों पर मजदूर–किसान–जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे।

🎤📣पदभार ग्रहण करते ही कामरेड विमल चौधरी बोले:
“हमारा संगठन मजदूर वर्ग की एकता को और मज़बूत करेगा।
पहला लक्ष्य होगा – ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को जोड़ना और उनका विश्वास जीतना।
मजदूर–नियोक्ता संबंधों में संतुलन ज़रूरी है, लेकिन मजदूर हित ही हमारी प्राथमिकता होगी।”

नव नियुक्त अध्यक्ष ने कहा:_
संगठन की ताक़त उसके सदस्यों की एकजुटता और नेतृत्व पर विश्वास से आती है। मेरा पहला लक्ष्य रहेगा कि मजदूर वर्ग की एकता को और मज़बूत किया जाए, अधिकाधिक श्रमिकों को संगठन से जोड़ा जाए और उनका विश्वास अर्जित किया जाए। हमारा संगठन मजदूर और नियोक्ता के बीच की कड़ी बनकर कार्य करेगा, लेकिन हर हाल में मजदूरों के अधिकार और सम्मान की रक्षा ही हमारा ध्येय होगा।”


🚩 संगठन का संकल्प
शोषण के खिलाफ मज़दूर वर्ग की आवाज़ बुलंद करना।
हर उद्योग, हर कारखाने, हर खेत–खदान में मजदूर हितों की रक्षा।
संगठन और सदस्यों की ताक़त से ही न्यायपूर्ण समाज का निर्माण।
✊ मजदूर एकता ज़िंदाबाद
✊ भारतीय मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल ज़िंदाबाद
✊ कामरेड विमल चौधरी ज़िंदाबाद

स्वदेशी अपनाओ, आत्मनिर्भर भारत बनाओ: स्वामी रामदेव

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अमेरिकी टैरिफ पर योगगुरु रामदेव का प्रहार: स्वदेशी अपनाओ, आत्मनिर्भर भारत बनाओ”

नई दिल्ली।खबर सूत्र_29/08/2025
Janchoupal 36

योगगुरु स्वामी रामदेव ने अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाने के फैसले को अनुचित बताते हुए स्वदेशी अपनाने और अमेरिकी कंपनियों के बहिष्कार का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब भारत आत्मनिर्भर बने और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता खत्म करे।

अमेरिकी ब्रांडों के बहिष्कार की अपील
रामदेव ने स्पष्ट कहा कि भारतीय जनता को एप्पल, पेप्सी, मैकडॉनल्ड्स और केएफसी जैसे अमेरिकी ब्रांडों का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। उनका तर्क था कि जब भारतीय उपभोक्ता इन उत्पादों से दूरी बनाएंगे, तो वाशिंगटन को अपने कठोर और अनुचित व्यापारिक कदमों पर पुनर्विचार करने को मजबूर होना पड़ेगा।

“चुनौती को अवसर में बदलें”
योगगुरु ने जोर देकर कहा कि भारत को इस स्थिति को नए अवसर की तरह देखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि देश को घरेलू विनिर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इससे न केवल नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि भारत वैश्विक स्तर पर एक आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति बन सकेगा।
रामदेव ने कहा,

“भारत के पास दुनिया को जीवन जीने की कला सिखाने की क्षमता है। हमें अपने ज्ञान, योग, आयुर्वेद और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।”

अमेरिका-भारत संबंधों पर असर
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ को दोगुना कर 50% कर दिया है। यह फैसला रूस से भारत द्वारा कच्चे तेल की खरीद के बाद लिया गया। इससे पहले भी अमेरिका ने कई भारतीय आयातों पर 25% टैरिफ लगाया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच बने रणनीतिक रिश्तों पर गहरा असर पड़ सकता है।
👉 यह आर्टिकल राष्ट्रीयता, स्वदेशी आंदोलन और आत्मनिर्भर भारत की थीम पर आधारित है।

परिवार व्यवस्था व सुरक्षा हेतु तीन बच्चे जरूरी: मोहन भागवत

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परिवार व्यवस्था और सुरक्षा पर आरएसएस प्रमुख का जोर,धर्मांतरण और अवैध घुसपैठ से बढ़ी जनसंख्या असंतुलन की चुनौती।
आरक्षण पर भागवत का बयान – अन्याय झेलने वालों को सहारा मिलना चाहिए।
एकता की राह – जातीय खाई मिटाने पर बल।

Janchoupal 36_नई दिल्ली। खबर सूत्र_28/08/2025

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि देश के भविष्य और परिवार व्यवस्था की स्थिरता के लिए हर परिवार में कम से कम तीन बच्चे होना जरूरी है।
दिल्ली में चल रहे संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के दौरान उन्होंने विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बात की। भागवत ने कहा कि धर्मांतरण और अवैध घुसपैठ के कारण देश में जनसंख्या का संतुलन बिगड़ रहा है, और इस स्थिति को ठीक करने के लिए समाज को भी सरकार के साथ जिम्मेदारी निभानी होगी।
“हम सभी की एक पहचान – हम हिंदू हैं”
भागवत ने कहा,
“हम अखंड भारत के समर्थक हैं। हमने विभाजन का विरोध किया था और आज भी एकता पर विश्वास रखते हैं। एकता वहीं स्थापित की जाती है, जहां भिन्नता हो। हमारी मूल पहचान हिंदू के रूप में ही है।”

उन्होंने मंदिर, श्मशान और कुएं को साझा करने की बात दोहराते हुए कहा कि जातीय खाई मिटाकर समाज को एकजुट करना समय की जरूरत है।
आरक्षण पर स्पष्टता
आरक्षण के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि किसी वर्ग को ऐतिहासिक अन्याय झेलना पड़ा है और उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं मिला है, तो उन्हें सहारा मिलना चाहिए। भागवत बोले,
“जब तक समाज का वंचित वर्ग आत्मविश्वास से खड़ा नहीं हो जाता, तब तक आरक्षण का समर्थन जारी रहेगा। संविधान में जो व्यवस्था दी गई है, हम उसके साथ हैं।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि समाज में एकता तभी आएगी जब कोई गड्ढे में गिरा व्यक्ति ऊपर खींचा जाएगा।
धर्मांतरण पर चिंता
भागवत ने साफ कहा कि धर्म परिवर्तन व्यक्तिगत आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन इसमें किसी तरह का प्रलोभन या दबाव नहीं होना चाहिए।

🌊 बस्तर में बाढ़ से जंग

43 शिविरों में 2,196 लोग सुरक्षित | सीएम साय बोले – जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

📍 रायपुर, 28 अगस्त 2025 | जनचौपाल36 डेस्क

लगातार बारिश ने बस्तर संभाग के चार जिलों – बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बस्तर – का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदियाँ उफान पर हैं, गाँव जलमग्न हैं और लोग राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा –
“जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है। हर प्रभावित परिवार तक तुरंत मदद पहुँचे।”

📊 आँकड़ों में स्थिति

बारिश का कहर दंतेवाड़ा : 93.7 मिमी और 118.4 मिमी
सुकमा : 35 – 109.3 मिमी
बीजापुर : 34.9 – 50.2 मिमी
बस्तर : 67.3 – 121.3 मिमी
कुल प्रभावित गाँव : 25
राहत शिविर : 43
सुरक्षित लोग : 2,196 दंतेवाड़ा – 1,116
सुकमा – 790
बीजापुर – 120
बस्तर – 170

🚨 नुकसान का ब्योरा
5 लोगों की मौत
17 पशुधन की हानि
165 मकान आंशिक क्षतिग्रस्त
86 मकान पूरी तरह ढह गए

⚡ राहत कार्य
एनडीआरएफ और नगर सेना की टीमें नावों से लोगों को निकाल रही हैं।
“आपदा मित्र” भी सुकमा जिले में प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।
शिविरों में भोजन, दवा और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की गई है।

✍️ एडिटोरियल नजरिया
यह आपदा सिर्फ बारिश की मार नहीं, बल्कि सिस्टम की तैयारी की भी परीक्षा है। आँकड़ों के पीछे इंसानी चेहरे हैं, और उम्मीद यही है कि सरकार की सक्रियता और जनता का धैर्य मिलकर बस्तर को जल्द सामान्य बनाएगा।


“ट्रंप टैरिफ: भारत पर 50% अमेरिकी टैरिफ लागू,, नोटिफिकेशन जारी”

निर्यात उद्योग पर संकट, रोजगार और राजस्व पर असर।विश्व स्तरीय चर्चा भारत पर ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की

नई दिल्ली।28।08।2025

अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला लागू कर दिया है। मंगलवार देर रात जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, बुधवार 27 अगस्त सुबह 9:31 बजे से भारतीय निर्यात पर 50% तक शुल्क वसूला जाएगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह कदम रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत को दंडित करने के तौर पर उठाया है। इससे पहले 7 अगस्त को अमेरिका ने 25% टैरिफ लगाया था, और अब अतिरिक्त 25% शुल्क जोड़कर दर दोगुनी हो गई है।

कौन से सामान होंगे महंगे?
नोटिफिकेशन में दर्ज सूची के मुताबिक भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले तमाम सामान इस टैरिफ के दायरे में आएंगे। चाहे वे सीधे बाजार में इस्तेमाल हों या गोदाम से निकाले जाएं—हर स्थिति में 50% शुल्क वसूला जाएगा।

व्यापार वार्ता पर ग्रहण
भारत और अमेरिका पिछले कई महीनों से एक व्यापक ट्रेड डील को लेकर बातचीत कर रहे हैं। 25 अगस्त को छठे दौर की वार्ता तय थी, लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने इसे फिलहाल टाल दिया।
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि समझौते की कोशिशें सितंबर-अक्टूबर तक जारी रहेंगी। हालांकि, खेती-बाड़ी और डेयरी सेक्टर को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
भारत अमेरिकी दबाव के बावजूद जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों और डेयरी मार्केट को खोलने के पक्ष में नहीं है।

सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ बढ़ने से भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे। इसका असर खासकर टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स, स्टील और केमिकल्स जैसी इंडस्ट्री पर पड़ेगा।
निर्यात घट सकता है
लाखों नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है
सरकार के राजस्व में कमी आ सकती है

आगे की चुनौती
भारत के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी दबाव और घरेलू हितों के बीच संतुलन बनाने की है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द कोई समझौता नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में उद्योग और रोजगार, दोनों पर गहरा असर देखने को मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट को मिले दो नए जज: न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली नियुक्त

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली(खबर स्त्रोत_पीआईबी)
27/08/2015

भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत दो वरिष्ठ न्यायाधीशों को सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त किया है।

बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक अराधे और पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपुल मनुभाई पंचोली को अब सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया है।

संविधान के तहत महत्वपूर्ण नियुक्ति:_अनुच्छेद 124(2) के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इस प्रक्रिया में सर्वोच्च न्यायालय की कोलेजियम की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति की औपचारिक मंजूरी दी जाती है।
इस नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर और मजबूत हो गई है।

कौन हैं न्यायमूर्ति आलोक अराधे?:_जन्म: 14 अप्रैल 1964
कानून की पढ़ाई जबलपुर विश्वविद्यालय से की।
2002 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए।
2017 में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में ट्रांसफर हुए और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी रहे।
जुलाई 2023 से बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे।
वे अपने सख्त अनुशासन और संवैधानिक मामलों की गहरी समझ के लिए जाने जाते हैं।

कौन हैं न्यायमूर्ति विपुल मनुभाई पंचोली?:_जन्म: 17 सितंबर 1963
गुजरात यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की।
2004 में गुजरात हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए।
2023 में उन्हें पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
वे प्रशासनिक मामलों और आपराधिक कानून में विशेषज्ञ माने जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा स्थिति:_सुप्रीम कोर्ट में कुल 34 न्यायाधीशों का पद निर्धारित है, जिसमें मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं। हाल के महीनों में कई पद खाली थे, जिन्हें अब भरा जा रहा है।
न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की नियुक्ति से अदालत के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है।

न्यायपालिका के लिए बड़ा कदम

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों वरिष्ठ जजों का अनुभव सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाएगा।
साथ ही क्षेत्रीय विविधता और विभिन्न उच्च न्यायालयों से आने वाले न्यायाधीश न्यायपालिका की संतुलित संरचना को और मजबूत करेंगे।

उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: दो उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। (सूत्र: प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो — PIB)
भारत के अगले उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। अब मैदान में केवल दो उम्मीदवार बचे हैं।

बचे सिर्फ दो चेहरे, मुकाबला दिलचस्प होगा

25 अगस्त 2025 को नाम वापसी की अंतिम तिथि बीतने के बाद श्री बुचिरेड्डी सुदर्शन रेड्डी और श्री सी.पी. राधाकृष्णन ही रेस में बचे हैं।
दोनों नेताओं के बीच सीधे मुकाबले से इस बार चुनाव खासा दिलचस्प माना जा रहा है।

कब और कहाँ होगा मतदान?

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान मंगलवार, 9 सितंबर 2025 को संसद भवन परिसर के वसुधा भवन (कक्ष संख्या F-101) में होगा।
मतदान सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक और मतगणना उसी दिन शाम 6 बजे से शुरू होगी; परिणाम तुरंत घोषित कर दिए जाएंगे।

कौन अपना वोट दे सकता है?
निर्वाचन मंडल में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित और नामांकित सदस्य शामिल होंगे।
राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी वोट देने के पात्र हैं।

प्रशासनिक जिम्मेदारी किसके पास?
पूरा मतदान और गिनती का प्रबंध राज्यसभा के महासचिव और रिटर्निंग ऑफिसर श्री पी.सी. मोदी कर रहे हैं।
संसद भवन में आवश्यक व्यवस्थाएँ पहले ही तय कर दी गई हैं।

सूत्र: प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की 27 अगस्त 2025 की प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।


रायपुर में मालगाड़ी हादसा पटरी से उतरी ट्रेन

रायपुर में मालगाड़ी डिरेल, कई ट्रेनों पर पड़ा असर, उरकुरा में मालगाड़ी पटरी से उतरी।

रायपुर/खबर सूत्र/ जनचौपाल36_27/08/2025

रायपुर रेलवे स्टेशन के नजदीक मंगलवार सुबह बड़ा हादसा टल गया। सुबह 8:39 बजे उरकुरा लाइन में एक मालगाड़ी के दो पहिए पटरी से उतर गए। घटना के तुरंत बाद रेलवे अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुँचे और राहत कार्य शुरू किया।

दो घंटे में ट्रैक बहाल

करीब 10:50 बजे मालगाड़ी को फिर से पटरी पर चढ़ा दिया गया। यह ट्रेन पुणे से रवाना हुई थी और इसमें ऑटो लोड था। हादसे की वजह से ट्रैक अवरुद्ध हो गया और ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

आधा दर्जन से अधिक ट्रेनें हुईं प्रभावित

मालगाड़ी के डिरेल होने से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस और शालीमार–मुंबई एलटीटी एक्सप्रेस सहित आधा दर्जन से अधिक ट्रेनें प्रभावित हुईं। अप मिडिल लाइन और डाउन लाइन दोनों बाधित होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

रेलवे की त्वरित कार्रवाई

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, राहत कार्य के लिए तुरंत भिलाई मार्शलिंग यार्ड (बीएमवाई) से एमएफडी (ट्रक और वैन) मंगाए गए। समय पर की गई कार्रवाई से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और ट्रैक को सुचारू कर दिया गया।



मदर टेरेसा जयंती विशेष: मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म

भोगवादी संस्कृति के दौर में मानवतावाद की मिसाल : मदर टेरेसा
जिन्होंने सेवा और करुणा को जीवन का धर्म बनाया।”

मदर टेरेसा जयंती विशेष_जनचौपाल 36 :

वे केवल एक महिला नहीं थीं, बल्कि मानवता की मूर्ति थीं।
उनका पूरा जीवन यह संदेश देता है कि –
“भगवान को देखने के लिए किसी मंदिर या चर्च में मत जाओ,
दुखी और भूखे लोगों की सेवा करो, वहीं तुम्हें ईश्वर मिलेगा।”

हिंदूवादी दृष्टिकोण : सेवा ही पूजा है

भारतीय संस्कृति कहती है – “नर सेवा ही नारायण सेवा है।”
गीता में भी निष्काम कर्मयोग का संदेश है।
मदर टेरेसा ने इस सत्य को अपने जीवन में उतारा।
उन्होंने कभी यह नहीं पूछा कि सामने वाला किस धर्म का है।
उन्होंने केवल यह देखा कि कोई भूखा है, बीमार है या अकेला है।
उनका मानना था – “हर इंसान में भगवान है, उसकी सेवा ही पूजा है।”


वैश्विक सोच : पूरी दुनिया एक परिवार

मदर टेरेसा ने कोलकाता की गलियों में बीमार और अनाथ लोगों की सेवा शुरू की।
धीरे-धीरे उनका यह कार्य पूरी दुनिया में फैल गया।
उन्होंने रोगियों को दवा दी।
अनाथ बच्चों को माँ का स्नेह दिया।
भूखे को रोटी और बेघर को छत दी।
यही वह सेवा है जिससे पूरी दुनिया ने उन्हें केवल “टेरेसा” नहीं, बल्कि “मदर टेरेसा” कहना शुरू किया।


आज की सीख
आज समाज में धर्म और जाति के नाम पर विभाजन बढ़ रहा है।
लेकिन मदर टेरेसा का संदेश साफ है –
सच्चा धर्म केवल मानवता है।
अगर हम किसी पीड़ित का आंसू पोंछते हैं,
किसी भूखे को भोजन देते हैं,
तो वही सबसे बड़ा पूजा-पाठ है।

निष्कर्ष
मदर टेरेसा का जीवन हमें प्रेरणा देता है कि –
👉 सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं।
👉 करुणा से बड़ी कोई शक्ति नहीं।
👉 और मानवता से बड़ी कोई पूजा नहीं।
उनकी जयंती पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि
हम भी अपनी-अपनी क्षमता से समाज में प्रकाश फैलाएँगे।
✍️ लेख : जनचौपाल 36


गणेश : ज्ञान और सौंदर्य के मिलन का प्रतीक

गणेश चतुर्थी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि दर्शन और जीवन की गहरी शिक्षा का दिन है।

जनचौपाल-36 _27/08/2025

भारतीय परंपरा बताती है कि जब शिव (ज्ञान और चेतना) और शक्ति (ऊर्जा और सौंदर्य) का संगम होता है, तभी गणेश का जन्म होता है।
गणेश केवल देवता नहीं, बल्कि मानव जीवन के बुद्धि, विवेक, ऋद्धि और सिद्धि के प्रतीक हैं।

गणेश का स्वरूप : गहन दार्शनिक अर्थ
बड़ा मस्तक : विशाल दृष्टिकोण और गहरी सोच।
छोटे नेत्र : सूक्ष्म चीज़ों को देखने की क्षमता।
बड़े कान : सुनने और सीखने की शक्ति।
सूंड : लचीलापन और अनुकूलन का गुण।
एक दांत : अपूर्णता को स्वीकार कर भी जीवन को सार्थक बनाना।
मूषक वाहन : इच्छाओं (वासना) पर नियंत्रण और उन्हें साधन बना लेने का संकेत।
गणेश के इस स्वरूप में ज्ञान और सौंदर्य का संगम साफ झलकता है।

गणपति : ऋद्धि-सिद्धि और विवेक के स्वामी
भारतीय दर्शन कहता है कि—
👉 जहाँ विवेक है, वहाँ समृद्धि और सफलता स्वतः आती है।
इसीलिए गणेश को ऋद्धि-सिद्धि के स्वामी कहा गया।
वह हमें यह सिखाते हैं कि सुंदरता तभी स्थायी है जब उसमें ज्ञान और विवेक का आधार हो।


गणेश चतुर्थी का संदेश
इस पर्व पर हम मिट्टी की मूर्ति बनाकर पूजन करते हैं और फिर उसे जल में विसर्जित कर देते हैं।
यह प्रतीक है कि—

ज्ञान और सौंदर्य क्षणभंगुर रूपों में आते हैं,
लेकिन उनका आत्मिक संदेश अमर रहता है।
गणेश हमें जीवन के हर आरंभ में यह आशीर्वाद देते हैं कि—

“जहाँ सौंदर्य और ज्ञान साथ हों, वहाँ सफलता और सृष्टि का चमत्कार निश्चित है।”

डिस्क्लेमर
यह लेख गणेश चतुर्थी के अवसर पर दार्शनिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से लिखा गया है। इसका उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि गणेश जी के स्वरूप और संदेश को जीवन-दर्शन से जोड़कर समझाना है।