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Monday, October 19, 2026

फ्रांस में क्यों भड़का आक्रोश? महंगाई से लेकर बदहाल स्कूलों तक, सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग

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France Protests: फ्रांस में बढ़ती महंगाई और फ्यूल की कीमतों के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं. शुरुआत में छात्रों की समस्याओं को लेकर उठी आवाज अब महंगाई तक आ गई है. जनता सरकार के खिलाफ नारेबाजी आगजनी और दुकानों में लूटपाट कर रही है. इसके अलावा कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को भी निशाना बनाया है.

आंदोलन की प्रमुख वजह बढ़ती महंगाई और आम लोगों पर बढ़ता आर्थिक दबाव है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ने से परिवारों का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है. वहीं, लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि देश की संपत्ति और सत्ता कुछ लोगों तक सीमित होती जा रही है.

स्कूलों की खराब स्थिति भी विरोध की बड़ी वजह बनी है. छात्रों और शिक्षकों ने शिक्षकों की कमी, मजदूर संगठन बेहतर वेतन, पेंशन और सरकारी सेवाओं की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शन में पुलिस की कार्रवाई और कथित हिंसा को लेकर नाराजगी भी सामने आई है.

कौन कर रहा है प्रदर्शन?

इस आंदोलन में छात्र, युवा, मजदूर संगठन, किसान, वामपंथी कार्यकर्ता और 2018 के येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोग शामिल हैं. फ्रांस के प्रमुख श्रमिक संगठनों में शामिल CGT ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया है. सोशल मीडिया के जरिए लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की गई थी.

प्रदर्शन में अब तक कितना नुकसान हुआ?

हिंसा का असर पेरिस के अलावा लियोन, मार्सिले और लिमोज जैसे शहरों में भी दिखाई दिया है. पेरिस में दुकानों के शीशे तोड़े गए, कई दुकानों में लूटपाट हुई और वाहनों में आग लगाई गई. लियोन में टूरिस्ट ऑफिस की इमारत को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि लिमोज में सिटी हॉल का बड़ा हिस्सा आग से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ. मार्सिले में भी नगर प्रशासन की इमारत में तोड़फोड़ की गई.

कितने लोग घायल और कितने गिरफ्तार हुए?

 फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने 17 अक्टूबर की देर रात तक 1,200 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी. इससे पहले गृह मंत्रालय की ओर से करीब 400 लोगों को हिरासत में लेने का आंकड़ा दिया गया था.हिंसा में कम से कम 150 पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना भी दी गई.

कुल मिलाकर, फ्रांस का यह विरोध केवल महंगाई तक सीमित नहीं रह गया है.  हालांकि, प्रदर्शनकारियों की मांगों और आगजनी-लूटपाट करने वाले समूहों की गतिविधियों को अलग-अलग समझना जरूरी है. सरकार ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है.

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