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Wednesday, March 11, 2026

पश्चिम एशिया तनाव : निर्यात गतिविधियां प्रभावितगल्फ देशों को भेजी गई कारें होंगी वापस चेन्नई बंदरगाह

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नई दिल्ली, 11 मार्च 2026:

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के समुद्री व्यापार और निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है। स्थिति ऐसी बन गई है कि कई जहाजरानी कंपनियां अपने समुद्री रास्तों में बदलाव करने पर मजबूर हो रही हैं, जिससे निर्यात की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

खबर सूत्रों पर ताजा मामला करीब 2000 कारों का है, जिन्हें गल्फ देशों के लिए भेजा गया था। अब मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इन्हें वापस चेन्नई बंदरगाह लाने की संभावना जताई जा रही है। इससे साफ है कि क्षेत्रीय तनाव का असर भारत के व्यापार और निर्यात गतिविधियों तक पहुंच रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ये गाड़ियां हुंडई मोटर इंडिया द्वारा गल्फ देशों के बाजारों के लिए भेजी गई थीं। योजना के मुताबिक इन्हें हंबनटोटा बंदरगाह के रास्ते पश्चिम एशिया के देशों तक पहुंचाया जाना था।
हालांकि समुद्र में बढ़े जोखिम के कारण कई जहाजरानी कंपनियां अपने जहाजों के मार्ग और माल ढुलाई की व्यवस्था की समीक्षा कर रही हैं। बंदरगाह अधिकारियों के अनुसार प्रमुख समुद्री रास्तों जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के आसपास की स्थिति को देखते हुए जहाजों की आवाजाही में सावधानी बरती जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार लगभग 4000 कंटेनरों को उनके तय मार्ग से वापस मोड़ दिया गया है, जिनमें से करीब 1800 कंटेनर चेन्नई से भेजे गए थे। फरवरी के आखिर से हालात बदलने के बाद तमिलनाडु के बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही भी कुछ धीमी हो गई है।

इसका असर खासकर वी. ओ. चिदंबरनार पोर्ट पर देखा जा रहा है, जो गल्फ देशों के लिए कंटेनर निर्यात का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां से सामान्य तौर पर कपड़े, घरेलू उपयोग के वस्त्र, खाद्य पदार्थ, अंडे और इंजीनियरिंग से जुड़े उत्पाद पश्चिम एशिया भेजे जाते हैं।

मौजूदा परिस्थितियों के कारण कई माल भेजने की प्रक्रियाओं में देरी हो रही है या उनके मार्ग बदलने पड़ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर 28 फरवरी को झोंग गु ताई युआन मालवाहक जहाज लगभग 250 कंटेनर लेकर थूथुकुडी बंदरगाह से रवाना हुआ था, लेकिन समुद्र में आगे बढ़ने के बाद उसे अपना रास्ता बदलना पड़ा और माल को जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह पर उतारना पड़ा।

स्थिति को देखते हुए चेन्नई बंदरगाह प्राधिकरण वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम कर रही है। वी. ओ. चिदंबरनार पोर्ट
के टर्मिनल के बाहर करीब 20,000 वर्ग मीटर क्षेत्र को अस्थायी माल भंडारण के रूप में उपयोग करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर कंटेनरों को वहां रखा जा सके।

बंदरगाह प्राधिकरण और निर्यातकों के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं, जिनमें जहाजों को संवेदनशील समुद्री मार्गों से बचाते हुए दूसरे सुरक्षित समुद्री रास्तों पर भी विचार किया जा रहा है।

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