डिजिटल डेस्क 16/03/2026 लखनऊ/उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित सब-इंस्पेक्टर (SI) की लिखित परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न ने प्रदेश की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में उबाल ला दिया है। 14 मार्च को हुई इस परीक्षा के हिंदी खंड में ‘अवसरवादी’ शब्द के विकल्प के रूप में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग किए जाने पर ब्राह्मण समाज और प्रबुद्ध वर्ग ने गहरी आपत्ति जताई है।
इसी विषय पर गाँव की चौपाल में ज्वाला सिंह और ज्योतिपति के बीच तीखा और वैचारिक संवाद हुआ, जो वर्तमान व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है।
चौपाल संवाद: जब ‘पंडित’ शब्द पर छिड़ी रार
चौपाल में दनदनाते हुए प्रवेश करते ही ज्वाला सिंह ने अपना रोष व्यक्त किया:
“देखो ज्योतिपति जी, यह उत्तर प्रदेश में पंडित शब्द का कैसा घृणित प्रयोग किया जा रहा है! सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा में ‘अवसरवादी’ के विकल्प में ‘पंडित’ देना क्या उन आरक्षण के भस्मासुरों की साजिश नहीं है? यह हमारी आस्था और मर्यादा पर चोट है इसमें एक विकल्प आरक्षण भी तो हो सकता है।”
जब कोई अज्ञानी, क्रोधी और कामी (भस्मासुर की तरह) हो जाए, तो उसे सीधे तर्क या शास्त्र से नहीं सुधारा जा सकता। उसे केवल उसके अपने ही जाल में उलझाकर शांत किया जा सकता है इसके लिए क्या इन्हें विश्व मोहिनी का स्वरूप का दर्शन कराना होगा।
ज्योतिपति:
“ज्वाला, तुमने बहुत गूढ़ बात कही है। मोहिनी अवतार इस बात का प्रमाण है कि धर्म की रक्षा के लिए ‘अहंकार’ का दमन करना ही अंतिम लक्ष्य होता है, चाहे मार्ग कोई भी हो। भगवान विष्णु का स्त्री रूप धारण करना यह दिखाता है कि शक्ति केवल बल में नहीं, बल्कि ‘बुद्धि और कला’ में भी है। ज्ञान की अधिष्ठात्री माता सरस्वती हैं, जो स्त्री रूप में ही संपूर्ण जगत को प्रकाश देती हैं।”
ज्वाला सिंह:
“बिल्कुल ज्योतिपति जी! इसीलिए मैं कहता हूँ कि आज के इन ‘भस्मासुरों’ को, जो पंडित और ज्ञान की परंपरा का अपमान कर रहे हैं, उन्हें केवल ज्ञान के प्रकाश से ही भस्म किया जा सकता है। अज्ञानता का अंधकार तभी मिटेगा जब हम अपनी बौद्धिक विरासत पर गर्व करेंगे और इनके झूठ को बेनकाब करेंगे।”
ज्योतिपति ने शांत परंतु गंभीर स्वर में उत्तर दिया:
“ज्वाला, मूर्ख लोग पंडित का अर्थ जान ही नहीं सकते। आपदा को अवसर में बदलना बुद्धिमानी है, अवसरवादिता नहीं। वेदों की रचना सृष्टि के कल्याण के लिए हुई, जिसका मर्म ये अज्ञानी क्या समझेंगे? विश्वामित्र ने अवसर देखकर ही राम को मांगा था ताकि रावण का वध हो सके। यह अवसर पहचानना केवल पंडितों (ज्ञानियों) के वश की बात है।”
अब ज्वाला जरा देखो तो
सरकार का कड़ा रुख और ‘भस्मासुर’ वाली चेतावनी
इस विवाद के तूल पकड़ते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सभी भर्ती बोर्ड के चेयरपर्सन्स को हिदायत दी है कि किसी भी जाति, पंथ या संप्रदाय की मर्यादा के खिलाफ टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ज्वाला सिंह ने आरक्षण की नीति पर प्रहार करते हुए कहा
“ज्योतिपति जी, आजादी की लड़ाई में पंडितों का त्याग सर्वोपरि था। लेकिन आज आरक्षण की सोच ने ‘भस्मासुर’ पैदा कर दिए हैं। आरक्षण एक वरदान था, अधिकार नहीं। अब ये भस्मासुर पूरे देश को भस्म करने पर तुले हैं। विकल्प में ‘पंडित’ की जगह ‘आरक्षण’ क्यों नहीं लिखा गया? क्या 78 साल का यह देश अब भी इन विसंगतियों को सहेगा?”
राजनीतिक गलियारों में हलचल
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश बीजेपी के सचिव अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी स्पष्ट किया है कि किसी भी समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाना “बिल्कुल अस्वीकार्य” है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
अस्वीकरण: प्रस्तुत संवाद पूर्णतः वैचारिक है, इसे किसी वाद-विवाद या व्यक्तिगत आक्षेप के रूप में न देखा जाए। हमारी दृष्टि में “पंडित” ज्ञान का प्रतीक है और “भस्मासुर” अज्ञानता व अहंकार का। अज्ञानता को उजागर करना और ज्ञान की महत्ता स्थापित करना पत्रकारिता का धर्म है, अपराध नहीं।


