परिवार व्यवस्था और सुरक्षा पर आरएसएस प्रमुख का जोर,धर्मांतरण और अवैध घुसपैठ से बढ़ी जनसंख्या असंतुलन की चुनौती।
आरक्षण पर भागवत का बयान – अन्याय झेलने वालों को सहारा मिलना चाहिए।
एकता की राह – जातीय खाई मिटाने पर बल।
Janchoupal 36_नई दिल्ली। खबर सूत्र_28/08/2025
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि देश के भविष्य और परिवार व्यवस्था की स्थिरता के लिए हर परिवार में कम से कम तीन बच्चे होना जरूरी है।
दिल्ली में चल रहे संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के दौरान उन्होंने विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बात की। भागवत ने कहा कि धर्मांतरण और अवैध घुसपैठ के कारण देश में जनसंख्या का संतुलन बिगड़ रहा है, और इस स्थिति को ठीक करने के लिए समाज को भी सरकार के साथ जिम्मेदारी निभानी होगी।
“हम सभी की एक पहचान – हम हिंदू हैं”
भागवत ने कहा,
“हम अखंड भारत के समर्थक हैं। हमने विभाजन का विरोध किया था और आज भी एकता पर विश्वास रखते हैं। एकता वहीं स्थापित की जाती है, जहां भिन्नता हो। हमारी मूल पहचान हिंदू के रूप में ही है।”
उन्होंने मंदिर, श्मशान और कुएं को साझा करने की बात दोहराते हुए कहा कि जातीय खाई मिटाकर समाज को एकजुट करना समय की जरूरत है।
आरक्षण पर स्पष्टता
आरक्षण के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि किसी वर्ग को ऐतिहासिक अन्याय झेलना पड़ा है और उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं मिला है, तो उन्हें सहारा मिलना चाहिए। भागवत बोले,
“जब तक समाज का वंचित वर्ग आत्मविश्वास से खड़ा नहीं हो जाता, तब तक आरक्षण का समर्थन जारी रहेगा। संविधान में जो व्यवस्था दी गई है, हम उसके साथ हैं।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि समाज में एकता तभी आएगी जब कोई गड्ढे में गिरा व्यक्ति ऊपर खींचा जाएगा।
धर्मांतरण पर चिंता
भागवत ने साफ कहा कि धर्म परिवर्तन व्यक्तिगत आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन इसमें किसी तरह का प्रलोभन या दबाव नहीं होना चाहिए।


