नई दिल्ली _25/10/2025
देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों दो चरम स्थितियों से जूझ रही है—एक हवा में घुलता जहर और दूसरी शराब की बढ़ती खपत। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार 300 के पार ,जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया है। प्रदूषण चेतावनी सीमा को पार कर चुका डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है। बावजूद इसके, प्रदूषण नियंत्रण के उपाय वही पुराने हैं—गाड़ियाँ बंद करने या निर्माण कार्य रोकने जैसे अस्थायी कदम। सवाल यह है कि क्या दिल्ली हर साल सिर्फ ‘धुंध और दमघोंटू हवा’ के लिए याद रखी जाएगी?
दीवाली पर शराब आंकड़ा चौंकाता है की बिक्री नए रिकॉर्ड तोड़ रही है। त्योहारी मौसम में दिल्ली सरकार को लगभग 600 करोड़ रुपए का राजस्व मिला है, जो पिछले साल से करीब 15 प्रतिशत अधिक है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में उत्पाद शुल्क और वैट से कुल राजस्व 4,192 करोड़ रुपए पहुंच गया है। यानी जहां हवा में जहर घुल रहा है, वहीं शराब के जरिए सरकारी खजाना लगातार भर रहा है।
आने वाले महीनों में कमाई और बढ़ने की उम्मीद है। नवंबर-दिसंबर शादी सीज़न शराब की मांग बढ़ेगी और नए साल के जश्न पर चरम छुएगी। आबकारी विभाग अस्थायी लाइसेंस से थोक बिक्री को बढ़ावा भी दे रहा है। दूसरी ओर, शराब कंपनियों के शेयरों में भी तेजी देखी जा रही है कंपनियां निवेशकों के लिए फायदे का सौदा बन रही हैं।
दिल्ली की यह विडंबना सोचने पर मजबूर करती है— हवा जहरीली हो रही है, सरकार की आय शराब से बढ़ रही है। जनता की सांसें घुट रही हैं, खजाने में पैसा बढ़ रहा है।


