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Saturday, March 7, 2026

मिडिल ईस्ट की आग, भारत की रसोई तक पहुंची — LPG सिलेंडर फिर हुआ महंगा

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डिजिटल डेस्क _ 07 मार्च 2026
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर अब सीधे भारतीय रसोई पर पड़ने लगा है। आज से देशभर में घरेलू और कमर्शियल — दोनों एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं। इंडियन ऑयल कंपनी (IOC) ने आज सुबह ही अपनी वेबसाइट पर नई रेट लिस्ट अपडेट कर दी।

कितना बढ़ा दाम?
घरेलू सिलेंडर (14.2 किलो): दिल्ली में कीमत ₹853 से बढ़कर ₹913 हो गई, यानी ₹60 की बढ़ोतरी
कमर्शियल सिलेंडर (19 किलो): दिल्ली में कीमत ₹1,768 से बढ़कर ₹1,883 हो गई, यानी ₹115 की बढ़ोतरी
यह बढ़ोतरी आम परिवारों के लिए बड़ा झटका है, खासकर उन घरों के लिए जहां पहले से ही बजट तंग है।

क्यों बढ़े दाम? — असली वजह
मध्य पूर्व के देशों में छिड़े युद्ध के चलते कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आयात करता है। जब आयात महंगा होता है, तो उसका बोझ अंततः उपभोक्ता पर ही डाला जाता है — अतिरिक्त भार वहन उपभोक्ता ही करेंगे।

समीक्षात्मक नजरिया: सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इस मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए पहले से तैयार थी? क्या बफर स्टॉक पर्याप्त था? विशेषज्ञ लंबे समय से चेताते रहे हैं कि एकल स्रोत पर निर्भरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरनाक है।

सरकार ने क्या किया?
बढ़ती कीमतों और संभावित कमी के बीच सरकार ने कुछ आपातकालीन कदम उठाए हैं:
सभी सरकारी और निजी तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
रिफाइनरियों को प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल उत्पादन की बजाय एलपीजी उत्पादन में प्राथमिकता देने को कहा गया है।
आपातकालीन शक्तियों का उपयोग कर यह आदेश लागू किए गए हैं।
समीक्षात्मक नजरिया: ये कदम सराहनीय हैं, लेकिन “आपातकाल के बाद सक्रिय होना” एक प्रतिक्रियात्मक नीति है, न कि दूरदर्शी। भारत को दीर्घकालिक ऊर्जा विविधीकरण की जरूरत है — जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा और घरेलू गैस उत्पादन में बड़े पैमाने पर निवेश।
आम आदमी पर क्या असर?
होटल, ढाबे और छोटे रेस्तरां — जो कमर्शियल सिलेंडर पर निर्भर हैं — उनकी लागत तेज़ी से बढ़ेगी, जिसका असर खाने-पीने की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर घरेलू सिलेंडर का ₹60 का अतिरिक्त बोझ सालाना ₹720 तक जा सकता है।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए भी यह झटका कम नहीं है।

अब क्या?
मिडिल ईस्ट का संकट अब महज एक भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं रहा — यह हर भारतीय की रसोई की आग से जुड़ा सवाल बन चुका है। सरकार के तात्कालिक कदम राहत दे सकते हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए ऊर्जा नीति में दीर्घकालिक सुधार अनिवार्य है।


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