वर्तमान स्थिति में राज्यसभा में एनडीए के पास 129 सीटें हैं, जबकि विपक्ष के पास 78 सीटें हैं। 2026 के ये चुनाव न केवल संख्या संतुलन बदल सकते हैं, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीतियों और विधायी दिशा को भी प्रभावित कर सकते हैं।
नई दिल्ली, 23 दिसंबर 2025
साल 2026 देश की राजनीति के लिए अहम रहने वाला है। एक ओर कई बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, वहीं दूसरी ओर राज्यसभा में भी बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा। वर्ष 2026 में उच्च सदन की कुल 75 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संख्या संतुलन प्रभावित हो सकता है।
राज्यसभा की ये सीटें अप्रैल, जून और नवंबर 2026 के दौरान खाली होंगी। इनमें उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक 10 सीटें रिक्त होने जा रही हैं, जबकि बिहार से 5 सीटों पर चुनाव होंगे। इसके अलावा महाराष्ट्र, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर राज्यों से भी कई सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होगा। इस व्यापक बदलाव को उच्च सदन में एक निर्णायक चरण के रूप में देखा जा रहा है।
2026 में जिन वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल समाप्त होगा, उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, दिग्विजय सिंह और शरद पवार जैसे नाम शामिल हैं। सत्तापक्ष से भी कुछ केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजनीतिक दल अपने अनुभवी नेताओं को फिर मौका देते हैं या नए चेहरों को आगे बढ़ाते हैं।
बिहार में अप्रैल 2026 में राज्यसभा की 5 सीटें खाली होंगी, जिनके लिए मार्च तक चुनाव होने की संभावना है। वहीं उत्तर प्रदेश की 10 सीटें नवंबर 2026 तक रिक्त हो जाएंगी, जिससे देश के सबसे बड़े राज्य की भूमिका निर्णायक हो सकती है। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश, असम, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी सदस्य बदलेंगे।


