नई दिल्ली_11/12/1025
संसद में चुनाव सुधारों पर चल रही चर्चा के दौरान राजस्थान के सांसद हनुमान बेनीवाल ने यह सुझाव दिया कि जो मतदाता लगातार तीन बार मतदान में हिस्सा नहीं लेते, उनके नाम को मतदाता सूची से हटाने की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उनके इस प्रस्ताव ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस को जन्म दिया है।
सांसद ने कहा कि मतदान लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल जिम्मेदारी है और लगातार अनुपस्थित रहने वालों पर कुछ “जवाबदेही” तय होनी चाहिए। संसद में मौजूद सदस्यों ने इस पर मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की। कुछ सदस्यों का कहना था कि यह मतदान प्रतिशत बढ़ाने का एक तरीका हो सकता है, जबकि अन्य ने इसे अत्यधिक कठोर बताया।
विशेषज्ञों की राय
चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए वर्तमान में स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया तय है, जिसमें मतदाता को नोटिस देना अनिवार्य है। वे कहते हैं कि किसी भी बदलाव के लिए पूर्व सूचना, विस्तृत कानूनी संशोधन और व्यापक सहमति आवश्यक होगी।
चुनाव आयोग का प्रावधान
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया केवल
निर्धारित कारणों,सत्यापन,और नोटिस जारी होने
के बाद ही की जा सकती है। इसलिए किसी भी नए प्रस्ताव पर विचार करने से पहले विधिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
लोकतांत्रिक संदर्भ
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदान के प्रति जागरूकता और सुविधा बढ़ाने पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए, ताकि लोग स्वेच्छा से मतदान केंद्रों तक पहुंचें। मतदाता शिक्षा, सुविधा और डिजिटल सेवाओं को सशक्त करना अधिक प्रभावी कदम माने जाते हैं।


