रायपुर/छत्तीसगढ़_18 अक्टूबर 2025 — बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के उन्मूलन अभियान को नई दिशा देते हुए 210 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जगदलपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि यह आत्मसमर्पण “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के तहत हुआ है, जिसे सरकार शांति, विश्वास और विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम मान रही है। मुख्यमंत्री ने इसे नीतियों और विश्वास से आए परिवर्तन का प्रतीक बताया।
आत्मसमर्पण करने वालों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य, एक रीजनल कमेटी सदस्य, 22 डिविजनल कमेटी सदस्य, 61 एरिया कमेटी सदस्य और 98 पार्टी सदस्य शामिल हैं। इन पर कुल 9.18 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। समारोह के दौरान 210 कैडरों ने 153 हथियार जमा किए, जिनमें 19 एके-47, 17 एसएलआर, 23 इंसास राइफलें, एक इंसास एलएमजी, और 11 बीजीएल लॉन्चर सहित अन्य हथियार शामिल रहे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह आत्मसमर्पण हिंसा की जड़ों को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि अबूझमाड़ जैसे इलाकों में जहां कभी भय का माहौल था, वहां आज विकास और समाजिक एकता का वातावरण बन रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025”, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पूना मारगेम” जैसी योजनाएं क्षेत्र में संवाद, संवेदना और विकास के नए अवसर पैदा कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से यह आत्मसमर्पण संभव हुआ है। उन्होंने सभी सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सामूहिक प्रयास भविष्य के शांति और समृद्ध बस्तर की नींव बनेगा। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और केंद्रीय बलों के अधिकारी उपस्थित रहे।
“मुख्यधारा में लौटे माओवादी कैडर: बस्तर में शांति और विकास का नया उजाला_ मुख्यमंत्री साय


