मनरेगा का नाम हुआ पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना
नई दिल्ली, 13 दिसंबर 2025
सरकारी ग्रामीण रोजगार योजना में बड़ा बदलाव: मनरेगा का नाम अब ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ कर दिया गया है। केंद्रीय कैबिनेट की शुक्रवार को हुई बैठक में योजना के नाम के साथ-साथ इसके ढांचे में भी व्यापक सुधार का ऐलान किया गया। इस बदलाव का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाना तथा रोजगार की वास्तविक गारंटी सुनिश्चित करना है।
मोदी सरकार ने मनरेगा योजना के तहत प्रतिवर्ष मिलने वाले रोजगार की अवधि को भी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है। इससे विशेष रूप से जंगली और आपदा-प्रवण इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को स्थिर आय और बेहतर आजीविका का लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिये यह योजना सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा जाल में से एक मानी जाती है।
सरकार ने न केवल नाम और रोजगार अवधि में बदलाव किया है, बल्कि योजना के कार्यान्वयन में सुधार लाने की दिशा में भी कई कदम उठाए हैं। डिजिटल हाजिरी (डिजिटल अटेंडेंस) प्रणाली को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि फर्जी जॉब कार्ड, गलत फोटो और अन्य मनरेगा से जुड़े कदाचारों को रोका जा सके। इसके अलावा, गांवों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों को प्राथमिकता देने तथा अप्रासंगिक गतिविधियों को हटाने की भी योजना बनाई जा रही है।
मनरेगा की शुरुआत 2005 में यू.पी.ए. शासनकाल में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के रूप में हुई थी और 2009 में इसका नाम ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ रखा गया।
आज यह योजना लगभग 15 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराती है, जिसमें करीब एक-तिहाई लाभार्थी महिलाएँ हैं।
सरकार का कहना है कि ये बदलाव योजना की पारदर्शिता बढ़ाने, ग्रामीण-शहरी पलायन घटाने और खासकर महिलाओं की भागीदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। ये प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करेंगे।


