नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर हमेशा से उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। अब देखना यह है कि राज्यसभा जाने के बाद बिहार की सत्ता किसके हाथ आती है और JDU का भविष्य क्या होगा। यह बिहार ही नहीं, पूरे देश की राजनीति को प्रभावित करने वाला घटनाक्रम है।
पटना_ 6 मार्च 2026
बिहार मख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब से नामांकन राज्यसभा के लिए डाला है बिहार की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची हुई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया, उनका कहना भी है कि मैं इस राजनीतिक दिशा के लिए 5 दशकों से सोच रहा था,इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। इस घटनाक्रम ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
क्या है पूरा मामला?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार को बिहार की मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाकर राज्यसभा भेजा जा रहा है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सीएम नीतीश कुमार और उनकी पार्टी को खत्म करना चाहती है और बिहार में “महाराष्ट्र मॉडल” लागू किया जा रहा है।
तेजस्वी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा — “घोड़ा तो चढ़ाया, लेकिन फेरे किसी और के साथ।”
रोहिणी आचार्य का तीखा वार
लालू प्रसाद यादव की बेटी और राजद नेता रोहिणी आचार्य ने भी नीतीश कुमार पर हमला बोला। रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अपनों के साथ बारम्बार बेवफाई करने वाले नीतीश कुमार अपनी बदहाली के लिए खुद जिम्मेदार हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जनवरी 2024 में महागठबंधन का साथ छोड़ने का फैसला नीतीश की राजनीतिक गिरावट की शुरुआत थी।
JDU में बगावत की आशंका
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या नीतीश के बेटे निशांत कुमार JDU की कमान संभालेंगे और क्या इससे पार्टी में बगावत थमेगी। राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से जदयू की राजनीति और संगठन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
BJP का रुख — चुप्पी या रणनीति?
भाजपा की रणनीति के बारे में राजद का कहना है कि पार्टी ने जिस भी सहयोगी दल के साथ काम किया है, वहां यही हुआ है।इससे NDA के भीतर आपसी विश्वास पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बिहार में अगला कदम क्या?
बिहार राजनीति में संभावित नए मोड़ को लेकर यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या भाजपा को अब बिहार का मुख्यमंत्री पद मिलेगा। अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव होगा।


