युद्ध का मार्ग त्यागें: शांति समझौते और कूटनीतिक बातचीत से ही संभव है विवाद का स्थायी हल
नई दिल्ली_28 फरवरी 2026
ईरान और खाड़ी देशों के बीच बिगड़ते हालातों पर भारत सरकार ने अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बयान जारी कर क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत ने स्पष्ट किया है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और सभी पक्षों को तुरंत हिंसा का रास्ता छोड़कर बातचीत की मेज पर आना चाहिए।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान
विदेश मंत्रालय द्वारा 28 फरवरी 2026 को जारी बयान में कहा गया कि भारत इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव से बेहद चिंतित है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संबंधित देशों से अपील की है कि:
तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकी जाए और सभी पक्ष अधिकतम संयम बरतें।
विवादों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है।
आम नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन प्राथमिकता होनी चाहिए।
भारतीय नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी
ईरान और इजरायल सहित खाड़ी देशों में मौजूद भारतीय मिशन वहां रह रहे भारतीय समुदाय के साथ लगातार संपर्क में हैं। सरकार ने एक विशेष एडवाइजरी जारी कर निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
भारतीय नागरिक पूरी तरह सतर्क रहें और स्थानीय सुरक्षा नियमों का पालन करें।
दूतावास के साथ संपर्क में रहें और अपनी जानकारी साझा करें।
क्षेत्र की संप्रभुता का सम्मान करते हुए तनाव कम करने के प्रयासों में सहयोग दें।
यूरोप में हड़कंप: आपात बैठकों का दौर जारी
अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद यूरोपीय देशों में सुरक्षा को लेकर हड़कंप मच गया है। मिडिल ईस्ट में फैले अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूरोपीय संघ (EU) ने कदम तेज कर दिए हैं:
फ्रांस: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक बुलाने की मांग की है।
ब्रिटेन और जर्मनी: दोनों देश अलग-अलग इमरजेंसी मीटिंग कर रहे हैं ताकि स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सके।
निकासी अभियान: यूरोपीय संघ ने कुछ क्षेत्रों से अपने स्टाफ को सुरक्षित निकालना शुरू कर दिया है।
अमेरिकी रुख और कूटनीतिक दुविधा
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल बढ़ा दी है, जिसमें उन्होंने ईरानी जनता से अपनी सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील की है। इस बयान के बाद यूरोपीय सहयोगियों के सामने एक बड़ी कूटनीतिक दुविधा पैदा हो गई है, जिससे वैश्विक शांति के प्रयासों को धक्का लगने की आशंका जताई जा रही है।
(खबर मीडिया सूत्रों पर आधारित,हमारा उद्देश्य पाठकों तक केवल जानकारी पहुँचाना है)


