साहित्य, कला और समाजसेवा में योगदान के लिए बहुआयामी प्रतिभा के धनी ललित मिश्रा को डी.लिट.
छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर के रचनाकार ललित मिश्रा को डी.लिट. की उपाधि।
राजिम/छत्तीसगढ़ -02/10/2026
समाज में जागरूकता, साहित्य, कला एवं शिक्षा के उन्नयन, नारी शक्ति के संरक्षण एवं सशक्तिकरण तथा सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राजिम निवासी ललित मिश्रा को डी.लिट. (Doctor of Literature) की उपाधि से सम्मानित किया गया है।
यह उपाधि डॉ. एस. राधाकृष्णन रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर, बेंगलुरु के प्रस्ताव पर ग्लोबल इन एनवायरमेंट यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका द्वारा प्रदान की गई है। यह सम्मान श्री मिश्रा के सामाजिक, साहित्यिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक योगदान को मान्यता प्रदान करता है।
ललित मिश्रा महान स्वतंत्रता सेनानी, छत्तीसगढ़ी भाषा के आदि कवि एवं छत्तीसगढ़ राज्य की परिकल्पना करने वाले पं. सुंदरलाल शर्मा के परिवार से आते हैं। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपनी धर्मपत्नी डॉ. सविता मिश्रा को दिया है, जो प्रख्यात साहित्यकार एवं कवयित्री होने के साथ शासकीय राजीव लोचन महाविद्यालय, राजिम तथा शासकीय फनिकेश्वरनाथ महाविद्यालय, फिंगेश्वर की पूर्व प्राचार्य रही हैं।
श्री मिश्रा का छत्तीसगढ़ के राज्य निर्माण आंदोलन में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्ष 1992 में उनके द्वारा तैयार की गई छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर आंदोलन के दौरान व्यापक रूप से प्रचलित हुई और बाद में यह तस्वीर छत्तीसगढ़ की पहचान तथा राज्य निर्माण आंदोलन में एकजुटता के प्रतीक के रूप में सामने आई।
श्री मिश्रा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय छात्र संघ समिति के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय श्री मिश्रा साहित्यकार, कवि, चित्रकार एवं रंगकर्मी के रूप में अपनी पहचान रखते हैं। वर्तमान में वे किसान महासंघ और बेटी बचाओ मंच के प्रदेश अध्यक्ष हैं। इसके अलावा वे राजिम में पं. सुंदरलाल शर्मा वाचनालय एवं स्मारक समिति तथा राजीव लोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष के रूप में भी सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।
डी.लिट. की यह उपाधि उनके दीर्घकालीन सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान को मिली महत्वपूर्ण मान्यता के रूप में देखी जा रही है।
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