जयपुर | 08/01/2026
अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में प्रशासनिक सुधार को लेकर विवाद बढ़ गया है। दरगाह से जुड़े करीब तीन हजार खादिमों ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के निर्देशों को मानने से इनकार कर दिया है। मंत्रालय ने जायरीनों से अभद्रता और अवैध वसूली रोकने के लिए खादिमों के लिए लाइसेंस व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।
इस संबंध में दरगाह कमेटी के नाजिम ने 5 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन मांगे थे, लेकिन तय समय तक एक भी खादिम ने आवेदन नहीं किया। इससे प्रशासन और खादिम संगठनों के बीच टकराव गहरा गया है।
लाइसेंस व्यवस्था का अंजुमन सैयद जागदान और अंजुमन शेख जागदान विरोध कर रही हैं। अंजुमन सैयद से करीब 2200 और अंजुमन शेख से लगभग 800 खादिम जुड़े हैं। संगठनों का कहना है कि यह उनकी पारंपरिक भूमिका और अधिकारों में दखल है।
पूर्व बीएसएफ डीआईजी बिलाल खान ने कहा कि दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम, 1955 की धारा 11(एफ) के तहत लाइसेंस व्यवस्था पूरी तरह वैध है और इससे पारदर्शिता आएगी।
वहीं, अंजुमन सैयद जागदान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने इसे “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा कि खादिम इसे नहीं मानेंगे। उनका आरोप है कि मंत्रालय दरगाह पर खर्च नहीं करता और अमले का भुगतान दरगाह की आय से होता है।
जायरीन और शिकायतें
जिला प्रशासन के अनुसार, दरगाह में रोजाना करीब एक लाख जायरीन पहुंचते हैं। 17 से 27 दिसंबर के उर्स में 14 लाख से अधिक श्रद्धालु आए। प्रशासन का कहना है कि मारपीट, धमकी और अवैध वसूली की शिकायतें मिलती रहती हैं।


