लखनऊ में सवर्ण मोर्चा के प्रदर्शन के बाद अब आध्यात्मिक जगत के संत रामभद्राचार्य उतरे बयान में।(खबर सूत्रों पर)
बस्ती/लखनऊ _21 फरवरी, 2026
घटनाक्रम में एक नया मोड़ ले आया है। इतने बड़े व्यक्तित्व का विरोध सरकार के लिए बड़ी चुनौती खड़ा कर सकता है।बस्ती में आयोजित राम कथा के दौरान प्रखर आध्यात्मिक गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने ‘यूजीसी समता विनियम 2026’ पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार को यह कानून हर हाल में वापस लेना होगा। जगद्गुरु ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “मेरे धर्माचार्य रहते यह कानून लागू नहीं हो सकता। सरकार को सोचना चाहिए कि यूजीसी के इस नए नियम की क्या आवश्यकता थी? समाज में इस तरह भेदभाव क्यों पैदा किया जा रहा है?”
जगद्गुरु ने आगे सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि देश को गृहयुद्ध जैसी स्थिति से बचाना है, तो इस विवादित कानून को तत्काल निरस्त करना होगा। उनके इस बयान ने लखनऊ में चल रहे सवर्ण मोर्चा के आंदोलन को वैचारिक मजबूती दे दी है।
मैदान में सवर्ण मोर्चा, पुलिस से तीखी झड़प
वहीं दूसरी ओर, लखनऊ के परिवर्तन चौक पर अभिनव त्रिपाठी और हाल ही में इस्तीफा देने वाले पूर्व सरकारी अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के नेतृत्व में सवर्ण समाज ने भारी हुंकार भरी। प्रदर्शनकारियों ने जब बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर इको गार्डन शिफ्ट किया गया है।
क्या है विवादित ‘समता विनियम 2026’?
यूजीसी का यह नया नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी, ओबीसी और दिव्यांगों के लिए ‘इक्विटी स्क्वॉड’ और ‘समता समिति’ अनिवार्य बनाता है। सवर्ण समाज और अब जगद्गुरु रामभद्राचार्य का मानना है कि संस्थानों में इस तरह की विशेष समितियों का गठन समाज को और अधिक विभाजित कर सकता है, जबकि यूजीसी का तर्क है कि यह भेदभाव रोकने के लिए जरूरी कदम है।


