21वीं सदी में विज्ञान से बड़ा कोई जादू नहीं,विज्ञान ही चमत्कार है।
रायपुर /छत्तीसगढ़/09/10/2025
क्या कभी आपने सोचा है कि जिस दुनिया में हम अंतरिक्ष यात्रा कर रहे हैं, मंगल ग्रह पर बस्ती बसाने की योजना बना रहे हैं, वहाँ आज भी लाखों लोग भूत-प्रेत, जादू-टोना और तंत्र-मंत्र के जाल में क्यों उलझे हुए हैं? यह सिर्फ एक बचकानी बात नहीं, बल्कि हमारे समाज के विकास पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है।
भ्रम का कोई अस्तित्व नहीं है, यह सब मन से उपजी बातें हैं।सच्ची सेवा, जागरूकता फैलाने और सही मार्ग दिखाने में है।
विज्ञान बनाम भ्रम: कहाँ है हमारा ध्यान?
हम 21वीं सदी में हैं, जो विज्ञान और तकनीक का युग है। हमने धरती की सीमाओं को पार कर लिया है, पर विडंबना यह है कि छत्तीसगढ़ जैसे कई राज्यों में आज भी एक बड़ा तबका अंधविश्वास और अंध श्रद्धा के गहरे दलदल में फंसा है।
यह समझना आवश्यक है कि जिसे हम ‘भूत-प्रेत बाधा’ मानते हैं, वह अक्सर मनोविकार या मानसिक रोग हो सकता है।
मानसिक रोग भी एक बीमारी है:
कैंसर या डायबिटीज की तरह, मानसिक रोगों को भी चिकित्सकीय जांच और उपचार की आवश्यकता होती है। उन्हें झाड़-फूँक या मारपीट से ठीक नहीं किया जा सकता। इसके लिए हमें बाबाओं या तथाकथित ‘दिव्य दरबारों’ के पास नहीं, बल्कि अस्पताल जाने की जरूरत है।
कर्म ही जीवन का आधार:
हमें आज दिग्भ्रमित होने की बजाय विज्ञान और कर्म की ओर देखना चाहिए। काम से बड़ा कोई धर्म नहीं, कर्म ही पूजा है। व्यक्ति कर्म से ही महान बनता है। यदि हमें कुछ सीखना है, तो मेहनत कर सफलता पाने की सीख देनी चाहिए, न कि चमत्कार और टोटकों पर भरोसा करना।
चमत्कार की मृगतृष्णा:
क्यों होता है भीड़ का जमावड़ा?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने लोगों को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास किया है। उनकी बातें स्पष्ट हैं:_भूत-प्रेत, जादू टोना, टोनही जैसी मान्यताओं का अस्तित्व नहीं है। जब कथावाचक या प्रचारक समस्याओं का समाधान चमत्कारिक टोटकों से करने का दावा करते हैं, तो वे सिर्फ लोगों को भ्रमित कर रहे होते हैं।
अब शासन प्रशासन और शिक्षित समाज समाधान का मार्ग और सामूहिक जिम्मेदारी दिखाएं
आपकी आर्थिक, स्वास्थ्य या मानसिक समस्याओं का वास्तविक समाधान केवल मेहनत, सही चिकित्सा और तर्कसंगत सोच से ही संभव है। चमत्कार के नाम पर भीड़ जुटाना और लोगों को झूठे भरोसे में डालना समाज और व्यक्ति दोनों को हानि पहुँचाता है।
लाखों लोग इन मजमों में शामिल होने के बाद भी अपनी समस्याओं के साथ वापस लौटते हैं।
पढ़े-लिखे लोगों द्वारा अंधविश्वास को बढ़ावा देना एक गंभीर समस्या है। इसलिए, शासन-प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि वह लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए ऐसे भ्रम फैलाने वाले कथित प्रचारों, चंगाई सभाओं और दिव्य दरबारों पर आवश्यक कदम उठाए और रोक लगाए।
याद रखें: चमत्कार नहीं, विज्ञान और कर्म ही हमें आगे ले जाएगा।
आइए, भ्रम की बेड़ियों को तोड़कर ज्ञान की राह पर चलें।


