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Saturday, March 7, 2026

सेफ्टी फीचर्स इंस्टाग्राम : अब बच्चों के सुसाइड सर्च पर माता-पिता को मिलेगा ‘इमरजेंसी अलर्ट’

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डिजिटल सुरक्षा के इस दौर में तकनीक का सही उपयोग ही समाधान है। यदि आपके आसपास कोई तनाव में है, तो उनसे बात करें और प्रोफेशनल मदद लें।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली/वॉशिंगटन | 27 फरवरी 2026

सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा (Meta) ने इंस्टाग्राम पर किशोरों की सुरक्षा को लेकर एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब यदि कोई किशोर इंस्टाग्राम पर आत्महत्या (Suicide) या खुद को नुकसान पहुंचाने (Self-harm) से जुड़े शब्दों को बार-बार सर्च करता है, तो प्लेटफॉर्म तुरंत उनके माता-पिता को सूचित करेगा।

इस फीचर का उद्देश्य डिजिटल दुनिया में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी करना और किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोकना है।

कैसे काम करेगा यह नया अलर्ट सिस्टम?
मेटा द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह फीचर विशेष रूप से उन किशोरों के लिए है जिनके अकाउंट ‘पैरेंटल सुपरविजन प्रोग्राम’ (Parental Supervision Program) के तहत जुड़े हुए हैं।

सर्च पर नजर: यदि कोई बच्चा डिप्रेशन या नुकसान पहुंचाने वाले कीवर्ड्स सर्च करता है, तो एल्गोरिदम इसे डिटेक्ट कर लेगा।
मल्टी-चैनल नोटिफिकेशन: माता-पिता को केवल ऐप पर ही नहीं, बल्कि ईमेल, टेक्स्ट मैसेज (SMS) और व्हाट्सएप के जरिए भी तत्काल अलर्ट भेजा जाएगा।
हेल्पलाइन सपोर्ट: इंस्टाग्राम सर्च रिजल्ट में ऐसे कंटेंट को ब्लॉक करने के साथ-साथ यूजर को स्थानीय हेल्पलाइन नंबर और काउंसलिंग सपोर्ट के सुझाव भी देगा।

क्यों पड़ी इस फीचर की जरूरत?
वर्तमान में मेटा कई कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहा है। लॉस एंजिल्स और न्यू मेक्सिको जैसे शहरों में अदालती कार्यवाही चल रही है, जहां आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। हालांकि मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने इन आरोपों को खारिज किया है, लेकिन यह नया अपडेट सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है।

पैरेंटल सुपरविजन का बढ़ता दायरा
इंस्टाग्राम ने स्पष्ट किया है कि यह अलर्ट सिस्टम उनकी ‘सख्त कंटेंट पॉलिसी’ का हिस्सा है। कंपनी पहले ही किशोरों के लिए ‘सेंसिटिव कंटेंट’ पर रोक लगा चुकी है। नया फीचर माता-पिता को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों में शामिल होने और उनके मानसिक संघर्ष को समझने का एक मौका देगा।

विशेषज्ञों की राय: तकनीक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फीचर जीवन रक्षक साबित हो सकता है, बशर्ते माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद का रास्ता खुला रहे।

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