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Saturday, March 7, 2026

भारत का जहाज निर्माण उद्योग बड़े बदलाव की ओर: 25,000 करोड़ का समुद्री विकास कोष, कर छूट और नई नीतियाँ

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सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि सरकार जहाज निर्माण वित्तीय सहायता नीति को नया रूप दे रही है, ताकि लागत से जुड़ी कमियों को दूर किया जा सके। इस बदलाव से भारतीय शिपयार्ड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने विदेशी प्रतिद्वंद्वियों के साथ बराबरी से प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे।

नई दिल्ली। (PIB):_केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का जहाज निर्माण उद्योग परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। सरकार ने बजट 2025 में ऐसे कई कदम उठाए हैं जो भारत को एक वैश्विक समुद्री शक्ति बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे।
मुख्य पहलें और सुधार:
25,000 करोड़ का समुद्री विकास कोष: 49% तक सरकारी योगदान, जहाज निर्माण व मरम्मत क्षमताओं के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए।
कर छूट: जहाज निर्माण व तोड़ने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क छूट अगले 10 साल तक बढ़ाई गई।
वित्तीय सहायता नीति: अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए जहाज निर्माण वित्तीय सहायता नीति को नया रूप।
ROFR का विस्तार: ₹200 करोड़ से कम मूल्य के जहाज भारतीय शिपयार्ड से ही खरीदे जाएंगे।
बुनियादी ढांचा दर्जा: बड़े जहाजों को इंफ्रास्ट्रक्चर हार्मोनाइज्ड मास्टर लिस्ट में शामिल कर सस्ती दीर्घकालिक फंडिंग का रास्ता।
मानकीकृत टग डिज़ाइन: प्रमुख बंदरगाहों के लिए पाँच नए टग डिज़ाइन, लागत-प्रभावशीलता और खरीद प्रक्रिया में तेजी।
कोचीन में ISRF उद्घाटन: ₹970 करोड़ की अंतर्राष्ट्रीय जहाज मरम्मत सुविधा से विदेशी मरम्मत पर निर्भरता कम होगी।
कौशल विकास: CSL और MDL प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना से जुड़े, युवाओं को जहाज निर्माण और समुद्री इंजीनियरिंग में प्रशिक्षण मिलेगा।
श्री सोनोवाल ने कहा,
भारत केवल जहाज नहीं बना रहा, हम एक लचीले भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।”

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