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Saturday, March 7, 2026

“747.2 अरब डॉलर बाहरी कर्ज पर भारत राज: GDP का मात्र 19%, विकास का इंजन!

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भारत का विदेशी कर्ज $747 अरब पहुंचा, लेकिन घबराओ मत—ये बोझ नहीं, विकास का साथी है

नई दिल्ली:29/12/2025

उभरती महाशक्ति भारत की चमकती अर्थव्यवस्था के पीछे विदेशी कर्ज का विशाल ढांचा छिपा है। क्या यह कर्ज बोझ है या विकास का इंजन? आरबीआई रिपोर्ट अनुसार जून 2025 तक भारत का कुल विदेशी कर्ज 747.2 बिलियन अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर चुका है, जो जीडीपी के 20% से कम है। लेकिन सवाल वही है—सबसे ज्यादा पैसा किस देश या संस्था से लिया गया? आंकड़ों से खुलासा होता है कि जापान, अमेरिका और बहुपक्षीय बैंकों का दबदबा है।

कर्ज कैसे बढ़ा: ट्रेंड और स्रोत
भारत का विदेशी कर्ज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इंडिया और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए लिया गया। आरबीआई डेटा के मुताबिक, 2020 के 558 अरब डॉलर से यह 35% उछाल के साथ पहुंचा। सबसे बड़ा हिस्सा (40%) जापान और USA के बिलेटरल लोन से, उसके बाद वर्ल्ड बैंक (15%) और ADB (12%)। एनआरआई डिपॉजिट्स ने 18% योगदान दिया, जो स्थिर फंडिंग का स्रोत बने। कोविड के बाद लिए गए 100 अरब डॉलर ने स्वास्थ्य और MSME को संभाला।

एनआरआई और कमर्शियल लोन की कुंजी
विदेशी भारतीयों के 150 अरब डॉलर डिपॉजिट ने जोखिम कम किया। कंपनियां ECB (एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग) से सस्ते लोन ले रही हैं, जो निर्यात को बढ़ावा दे रहे। लेकिन अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार कहते हैं, “मुद्रा उतार-चढ़ाव बड़ा खतरा है—रुपये की कमजोरी ब्याज बोझ बढ़ा सकती है।”कर्ज लेने वाला भारत, 70 देशों को लोन देने वाला भी
भारत अब सिर्फ उधारदार नहीं, बल्कि लेनदार भी है। 70+ देशों को 30 अरब डॉलर से ज्यादा LoC (लाइन ऑफ क्रेडिट) दिए, खासकर अफ्रीका और पड़ोसियों को। नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका को इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में मदद। इससे ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सॉफ्ट पावर मजबूत हुआ है।

(ख़बर मीडिया आधारित)

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