डिजिटल डेस्क | 10 मार्च 2026
स्टॉकहोम स्थित अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया में हथियार आयात करने वाले देशों में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। वैश्विक हथियार आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 8.2–8.3 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध प्रभावित यूक्रेन 9.7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत लगातार अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए हथियार खरीद रहा है। हालांकि पहले की तुलना में विदेशी हथियारों की खरीद में थोड़ी कमी आई है, क्योंकि भारत अब घरेलू उत्पादन और रक्षा आत्मनिर्भरता पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
रूस अब भी सबसे बड़ा सप्लायर
भारत को हथियार आपूर्ति करने वाले देशों में Russia अभी भी सबसे आगे है। भारत के कुल हथियार आयात में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा रूस से आता है। हालांकि पहले यह हिस्सेदारी काफी ज्यादा थी। 2010 के शुरुआती वर्षों में रूस का हिस्सा 70 प्रतिशत से अधिक था।
अब भारत ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए अन्य देशों से भी रक्षा उपकरण खरीद बढ़ाई है ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम हो सके।
फ्रांस और इज़राइल से बढ़ी खरीद
रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर बन गया है, जिसकी हिस्सेदारी करीब 29 प्रतिशत है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से Dassault Rafale fighter jet लड़ाकू विमानों की खरीद के कारण हुई है।
भारत और फ्रांस के बीच भारतीय वायुसेना के लिए 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित डील पर भी चर्चा चल रही है। इसके अलावा Israel तीसरे स्थान पर है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत है। इज़राइल से भारत मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और आधुनिक निगरानी उपकरण खरीद रहा है।
शीर्ष 5 हथियार आयातक देश
SIPRI रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के प्रमुख हथियार आयातक देशों में:
Ukraine
India
Saudi Arabia
Qatar
Pakistan
सुरक्षा चुनौतियों के कारण बढ़ा आधुनिकीकरण
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत अपनी सेना को मजबूत बनाने के लिए रक्षा आधुनिकीकरण पर जोर दे रहा है। China और Pakistan के साथ सीमा संबंधी चुनौतियों को देखते हुए आधुनिक हथियार और तकनीक की जरूरत बढ़ी है।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत
सरकार की Make in India और आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भारत अब रक्षा उत्पादन में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश की सरकारी और निजी कंपनियां स्थानीय स्तर पर हथियार और रक्षा उपकरण बनाने पर काम कर रही हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में घरेलू उत्पादन बढ़ने से विदेशी हथियारों पर निर्भरता और कम हो सकती है।
संक्षेप में: भारत एक संतुलित रणनीति अपना रहा है—जहां जरूरत के अनुसार विदेश से आधुनिक हथियार खरीदे जा रहे हैं, वहीं देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
आधुनिक हथियार खरीद में भारत दुनिया के दूसरे स्थान पर रूस अब भी सबसे बड़ा सप्लायर


