भारत देश आज की वर्तमान स्थिति में सभी देश के प्रति की गई भविष्यवाणियों से कहीं बेहतर है
इंदौर। मध्यप्रदेश :_16/09/2025
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत ने उन सभी भविष्यवाणियों को गलत साबित कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि आज़ादी के बाद यह देश बिखर जाएगा। वे रविवार को इंदौर में आयोजित एक पुस्तक विमोचन समारोह में बोल रहे थे।
आज़ादी के बाद भी भारत मजबूत और एकजुट
भागवत ने अपने संबोधन में पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल का उदाहरण देते हुए कहा, “चर्चिल ने दावा किया था कि भारत स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद टिक नहीं पाएगा और विभाजित हो जाएगा, लेकिन आज़ादी के 75 साल बाद भारत पहले से अधिक मज़बूती से खड़ा है। उल्टा, आज इंग्लैंड खुद विखंडन की स्थिति का सामना कर रहा है।”
3000 वर्षों तक विश्वगुरु रहा भारत
उन्होंने कहा कि जब भारत हजारों वर्षों तक ‘विश्वगुरु’ की भूमिका में था, तब विश्व स्तर पर कोई बड़ा संघर्ष नहीं था। भागवत के अनुसार, दुनिया में अधिकांश समस्याएं व्यक्तिगत स्वार्थों से जन्म लेती हैं। इसके विपरीत भारत का दृष्टिकोण हमेशा समग्रता और सहयोग पर आधारित रहा है।
भारत की आस्था तर्क और अनुभव से जुड़ी
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत केवल आस्था का देश ही नहीं, बल्कि तर्क और प्रत्यक्ष अनुभव का भी केंद्र है। “यहां की श्रद्धा आंख मूंदकर मान लेने वाली नहीं है, बल्कि ज्ञान और प्रमाण पर आधारित है। भारत की यही विशेषता उसे अन्य देशों से अलग करती है,” उन्होंने कहा।
नर्मदा परिक्रमा का उदाहरण
अपने वक्तव्य में भागवत ने नर्मदा नदी की परिक्रमा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारतीय श्रद्धा का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “हमारे यहां कर्मवीर भी हैं और तर्कवीर भी। यही संतुलन भारत की ताकत है। दुनिया केवल आस्था और विश्वास पर चलती है, लेकिन भारत कर्म, तर्क और आस्था तीनों का संगम है।”
संघर्षों का मूल कारण निजी स्वार्थ
मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में जो युद्ध और विवाद होते हैं, उनकी जड़ निजी स्वार्थ हैं। अगर सामूहिक सोच और कर्तव्य की भावना को प्राथमिकता दी जाए, तो विश्व में स्थायी शांति संभव है।


