कोलकाता/बारासात | 14 जनवरी, 2026
भारत अभी कोरोना के जख्मों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि पश्चिम बंगाल से आई एक खबर ने देश की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में निपाह वायरस (Nipah Virus) के संदिग्ध मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस बेहद घातक है, जिसकी मृत्यु दर 40% से 70% के बीच रहती है।
प्राप्त खबर अनुसार
बारासात के एक निजी अस्पताल में कार्यरत दो स्वास्थ्यकर्मी (एक महिला और एक पुरुष नर्स) अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। उनमें तेज बुखार, सिरदर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण देखे गए, जो निपाह संक्रमण की ओर इशारा करते हैं। फिलहाल दोनों वेंटिलेटर पर हैं और उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। उनके नमूने पुष्टि के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे भेजे गए हैं।
जांच में पता चला है कि ये दोनों कर्मी हाल ही में अपने पैतृक गांव पूर्वी मिदनापुर और पूर्व बर्धमान गए थे, जिसके बाद से संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया है।
सरकार की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय सक्रिय हो गया है। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात कर स्थिति की समीक्षा की। केंद्र ने नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (NJORT) को बंगाल रवाना किया है। प्रभावित क्षेत्रों में ‘कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग’ शुरू कर दी गई है ताकि संभावित मरीजों की पहचान की जा सके।
बचाव के लिए क्या करें और क्या न करें?
जब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो जाती, विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सावधानियों की सलाह दी है:
करें (Dos): फलों को अच्छी तरह धोकर और छीलकर खाएं। नियमित रूप से साबुन से हाथ धोएं। बुखार या मानसिक भ्रम जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
न करें (Don’ts): जमीन पर गिरे या पक्षियों द्वारा कुतरे गए फल न खाएं। खजूर का कच्चा रस पीने से बचें। संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से बचें।पश्चिम बंगाल में निपाह का इतिहास डराने वाला है। साल 2001 में सिलीगुड़ी में इसके प्रकोप से 45 लोगों की मौत हुई थी। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे पैनिक न करें, बल्कि सतर्क रहें।


