भाजपा के 11 पदाधिकारियों का इस्तीफा सोशल मीडिया वायरल,खबर मीडिया सूत्र पर आधारित।जनचौपाल_36 चौपाल से चौपाटी तक।
नई दिल्ली_27/01/2026
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को प्रोत्साहित करने के नियम–2026’ अब गंभीर विवाद के केंद्र में आ गए हैं। देशभर में इन नियमों को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह नियम संवैधानिक समानता के नाम पर नए सामाजिक विभाजन को जन्म दे रहे हैं।
इस विवाद की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बरेली से हुई, जहां सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मामला लखनऊ तक पहुंच गया, जहां भाजपा के 11 पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से पार्टी से इस्तीफा सौंप दिया। ये सभी पदाधिकारी बख्शी का तालाब विधानसभा क्षेत्र के कुम्हरावां मंडल से जुड़े हैं।
इस्तीफा देने वाले नेताओं का आरोप है कि UGC के नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को संदेह के घेरे में खड़ा करते हैं, जिससे उच्च शिक्षा संस्थानों में फर्जी शिकायतों और मानसिक उत्पीड़न की आशंका बढ़ेगी। उनका कहना है कि यह व्यवस्था सामाजिक सौहार्द के बजाय जाति आधारित अविश्वास को बढ़ावा दे सकती है।
राजनीतिक गलियारों में यह बहस भी तेज हो गई है कि जिस तरह कभी तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप कांग्रेस पर लगे, क्या अब भाजपा उसी राह पर चल रही है—बस वर्ग बदल गया है?
आलोचक पूछ रहे हैं कि ‘अखंड भारत’ और ‘सांस्कृतिक एकता’ की बात करने वाली विचारधारा अब शिक्षा नीति में सामाजिक विभाजन को क्यों बढ़ावा दे रही है।
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में UGC नियमों के साथ-साथ प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे ब्राह्मण समाज और साधु-संत परंपरा के अपमान से जोड़ा।
वहीं, लखनऊ भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्या ने कहा है कि उन्हें इस्तीफे का कोई आधिकारिक पत्र अभी प्राप्त नहीं हुआ है, हालांकि सोशल मीडिया पर पत्र वायरल है।
यह पूरा मामला अब केवल UGC नियमों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है—
क्या शिक्षा नीति अब वैचारिक और राजनीतिक हस्तक्षेप का औज़ार बनती जा रही है?


