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Saturday, March 7, 2026

चुनाव आयोग हुआ सख्त: बंगाल में ‘पर्दे के पीछे’ का खेल उजागर, 5 अफसरों पर गिरेगी गाज

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कोलकाता | 03 जनवरी, 2026

पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर और फर्जीवाड़े के आरोप में आयोग ने चार अधिकारियों और एक कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई मोयना और बारुईपुर पूर्व जैसे क्षेत्रों में पाई गई गंभीर अनियमितताओं के बाद की गई है।

सॉफ्टवेयर ने पकड़ी अफसरों की ‘डिजिटल चोरी’

जांच में खुलासा हुआ कि इन अफसरों ने लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी (Logical Discrepancy) यानी तार्किक विसंगतियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया। चुनाव आयोग के एडवांस सॉफ्टवेयर ने अलर्ट जारी किया था कि एक ही मकान नंबर पर 15 से 20 मतदाता पंजीकृत हैं, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है। नियमतः अधिकारियों को इसकी फिजिकल वेरिफिकेशन करनी थी, लेकिन अफसरों ने बिना मौके पर जाए ऑफिस में बैठकर ही उन्हें ‘वेरिफाइड’ घोषित कर दिया।

अनमैप्ड’ और मृत मतदाताओं का सहारा

आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, हजारों ऐसे मतदाता थे जिनका कोई स्थायी पता या पोलिंग बूथ मैप नहीं था। इन ‘अनमैप्ड’ वोटर्स को हटाने के बजाय सिस्टम में बनाए रखा गया। हद तो तब हो गई जब मोयना में कई मृत व्यक्तियों के नाम भी सूची में ‘जीवित’ मिले। मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध होने के बावजूद फॉर्म-7 (नाम हटाने का आवेदन) को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, ताकि बोगस वोटिंग का रास्ता साफ रहे।

24 लाख संदिग्धों का मास्टरमाइंड कौन?

राज्य में कुल 24 लाख संदिग्ध मतदाताओं की पहचान हुई है। आयोग का मानना है कि यह कोई ‘मानवीय भूल’ नहीं बल्कि एक सोची-समझी आपराधिक साजिश है। एक छोटे से कमरे में दर्जनों मतदाताओं को वैध बताना सीधे तौर पर लोकतंत्र की शुचिता से खिलवाड़ है।

आगे की राह:

पुलिस अब यह जांच करेगी कि क्या ये अधिकारी किसी विशिष्ट राजनीतिक दल के दबाव में काम कर रहे थे? 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होनी है। उससे पहले हुई यह कार्रवाई बंगाल के प्रशासनिक गलियारों में स्पष्ट संदेश है—लापरवाही की कीमत अब सीधे जेल होगी।

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