असम कांग्रेस का यह अभियान राज्य की राजनीति में एक बार फिर स्थानीय पहचान और भूमि अधिकार जैसे मुद्दों को केंद्र में ले आया है, जिस पर आने वाले समय में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
असम _गुवाहाटी/17/02/2026
असम में कांग्रेस ने राज्य सरकार की नीतियों के विरोध में ‘जाती बचाओ-माटी बचाओ’ अभियान के तहत हल्ला बोल कार्यक्रम आयोजित किया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन करते हुए स्थानीय पहचान, भूमि अधिकार और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाया।
कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा नीतियों से असम की स्थानीय जातीय पहचान (जाती) और भूमि-संस्कृति (माटी) को खतरा पैदा हो रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भूमि संबंधी निर्णयों, विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक कदमों में स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी की जा रही है।
कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि पार्टी असम के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उनका दावा है कि रोजगार, भूमि सुरक्षा और सामाजिक संतुलन जैसे मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह बनाया जाएगा। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
सरकार पर लगाए गए आरोप
कांग्रेस के अनुसार,भूमि और संसाधनों से जुड़े फैसलों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी कम हो रही है।विकास के नाम पर कुछ वर्गों के हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।
सामाजिक-आर्थिक असमानता बढ़ने का खतरा है।
हालांकि राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों को लेकर अलग-अलग मौकों पर इनकार किया जाता रहा है और सरकार का कहना है कि सभी योजनाएं कानून और विकास के दायरे में लागू की जा रही हैं।
आगे की रणनीति
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि ‘जाती बचाओ-माटी बचाओ’ अभियान को आने वाले दिनों में और तेज किया जाएगा। इसके तहत जनसभाएं, पदयात्राएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि आम लोगों तक पार्टी का संदेश पहुंचाया जा सके।


