चेन्नई, 27 दिसंबर 2025
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को सख्त सुझाव दिया कि ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर भारत में भी 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। जस्टिस ने कहा, “बच्चे देश के भविष्य हैं। डिजिटल दुनिया में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।” यह टिप्पणी नाबालिगों को आसानी से उपलब्ध होने वाले ऑनलाइन पोर्नोग्राफिक कंटेंट के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान आई।
याचिकाकर्ता एस. विजयकुमार के वकील केपीएस पलानीवेल राजन ने ऑस्ट्रेलिया के हालिया कानून का हवाला दिया, जहां 9 दिसंबर से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाने पर रोक लगा दी गई है। दुनिया का यह पहला ऐसा कानून बच्चों को हानिकारक कंटेंट से बचाने का मॉडल बन गया है। कोर्ट ने केंद्र से इस पर गंभीरता से विचार करने को कहा और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISP) पर सख्ती बरतने का निर्देश दिया।
याचिका में मांग की गई है कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, तमिलनाडु बाल अधिकार आयोग और ISP को अनिवार्य रूप से पैरेंटल कंट्रोल सिस्टम लागू करने के आदेश दिए जाएं। इससे माता-पिता बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों को फिल्टर और नियंत्रित कर सकेंगे। साथ ही, स्कूलों और समाज में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने की मांग उठी है। कोर्ट ने इस पुरानी PIL को गंभीरता से लेते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
आज की डिजिटल युग में बच्चे साइबर खतरों- साइबरबुलिंग, अश्लील सामग्री और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं- का शिकार हो रहे हैं। हाईकोर्ट का यह सुझाव बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विशाल देश में यह कदम चुनौतीपूर्ण लेकिन जरूरी है। सरकार का अगला कदम सभी की निगाहों में होगा।


