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Saturday, March 7, 2026

अंधभक्ति, श्रद्धा या चमत्कार? बिजनौर में कुत्ते की ‘परिक्रमा’ देख उमड़ा जनसैलाब

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खबर बहुत ही दिलचस्प और संवेदनशील समाचार है। ऐसी घटनाओं में अक्सर आस्था और तर्क के बीच एक महीन रेखा होती है।

बिजनौर (उत्तर प्रदेश) | 18 जनवरी, 2026

नंदपुर गांव का यह मंदिर कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। लोग दूर-दूर से इस ‘परिक्रमा’ को अपनी आंखों से देखने पहुंच रहे हैं। क्या यह वाकई कोई चमत्कार है या कुत्ते की कोई मानसिक स्थिति, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है।

डॉक्टरों की टीम ने क्या कहा?पशुचिकित्सकों ने कहा,👉
मामला चर्चा में आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पशु चिकित्सकों की एक टीम मौके पर पहुंची। डॉक्टरों द्वारा की गई प्राथमिक जांच के परिणाम चौंकाने वाले थे,,!
👉 “कुत्ता शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है। उसे न तो कोई चोट लगी है और न ही वह किसी स्पष्ट बीमारी से ग्रस्त है। उसका इस तरह का व्यवहार असामान्य है, लेकिन चिकित्सकीय रूप से वह फिट है।”

खबर सूत्रों से
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने विज्ञान और विश्वास के बीच नई बहस छेड़ दी है। नंदपुर गांव के एक प्राचीन हनुमान मंदिर में पिछले तीन दिनों से एक कुत्ता लगातार मूर्तियों की परिक्रमा कर रहा है। जहां श्रद्धालु इसे ‘ईश्वरीय संकेत’ मानकर कुत्ते के पैर छू रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे पशु व्यवहार या अंधविश्वास का नाम दे रहे हैं।

घटनाक्रम: 72 घंटों से जारी है ‘भक्ति’
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह सिलसिला सोमवार सुबह 4 बजे शुरू हुआ।
सूत्रों अनुसार कुत्ता सबसे पहले हनुमान जी की प्रतिमा के चारों ओर चक्कर काटते देखा गया।दो दिनों तक हनुमान जी की परिक्रमा करने के बाद, बुधवार से उसने मां दुर्गा की प्रतिमा के चक्कर लगाने शुरू कर दिए।

हैरतअंगेज बात: ग्रामीणों का दावा है कि इस दौरान कुत्ते ने अन्न-जल का त्याग कर रखा है। थकान होने पर वह रुकता नहीं, बल्कि लड़खड़ाते हुए भी अपनी परिक्रमा जारी रखता है।

अब आस्था और अंधविश्वास की तकरार
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मंदिर अब एक ‘तीर्थ’ बन चुका है। श्रद्धा ऐसी की महिलाएं कुत्ते के पैर छूकर आशीर्वाद ले रही हैं, लोग इसे भगवान की लीला मानकर पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण कर रहे हैं।

बौद्धिक तर्क:
आलोचकों का कहना है कि किसी पशु के व्यवहार को चमत्कार मानकर उसकी पूजा करना अंधविश्वास को बढ़ावा देता है। इससे पहले मैनपुरी के काल भैरव मंदिर में भी ऐसी ही घटना देखी गई थी।

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