‘ग्रीन अरावली’ के तहत संरक्षण और निगरानी पर सरकार का ज़ोर ‘ग्रीन अरावली’ से संरक्षण को मिली मजबूती।
नई दिल्ली, 23 दिसंबर 2025।
अरावली पहाड़ियों में खनन को लेकर हाल के दिनों में पैदा हुए भ्रम और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि अरावली क्षेत्र में खनन को लेकर किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी गई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अरावली का 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र पूरी तरह संरक्षित है और यह सुरक्षा पहले से अधिक मजबूत हुई है।
मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप अरावली को लेकर स्पष्ट परिभाषा तय की गई है, ताकि पर्यावरण संरक्षण में किसी तरह की अस्पष्टता न रहे। उन्होंने उन दावों को गलत बताया जिनमें कहा जा रहा था कि नए नियमों से खनन को बढ़ावा मिलेगा। उनके अनुसार, सरकार का उद्देश्य केवल और केवल अरावली की प्राकृतिक विरासत को बचाना है।
भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया और कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाए जा रहे “100 मीटर नियम” को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इस नियम को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे आम लोगों में भ्रम फैला। वास्तविकता यह है कि 100 मीटर की सीमा पहाड़ी की चोटी से नहीं, बल्कि उसके आधार से मानी जाती है। इस दायरे में किसी भी तरह की खुदाई या व्यावसायिक गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित है।
उन्होंने बताया कि यदि दो अरावली पहाड़ियों के बीच की दूरी कम है, तो उनके बीच की समतल भूमि भी अरावली का हिस्सा मानी जाएगी और वह भी संरक्षण के दायरे में आएगी। दिल्ली के संदर्भ में मंत्री ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अरावली से जुड़े इलाकों में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध पहले की तरह लागू रहेगा।


