यह बजट एक ऐसे भारत का प्रतिबिंब है जो अपनी जड़ों से जुड़ा है लेकिन जिसकी आंखें आसमान छूने को बेताब हैं। यह ‘विकसित भारत’ के संकल्प और सिद्धि के बीच के फासले को पाटने वाला एक संतुलित दस्तावेज है।
नई दिल्ली ( बजट):01/02/2026
रविवार के शुभ दिवस पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा सदन में आम बजट पेश किया गया।
जब हम 2047 तक ‘विकसित भारत’ का संकल्प बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं रह जाता, बल्कि वह उस भविष्य का ब्लूप्रिंट बन जाता है। इस वर्ष का बजट इसी महत्वाकांक्षी लक्ष्य के समानांतर एक आईना पेश करता है, जिसमें एक तरफ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की चमक है, तो दूसरी तरफ अंत्योदय (अंतिम व्यक्ति का उदय) का संकल्प। यह बजट स्पष्ट करता है कि विकसित भारत का रास्ता केवल महानगरों से नहीं, बल्कि देश के गांवों और कस्बों की आर्थिक मजबूती से होकर गुजरता है।
आत्मनिर्भरता की नींव और आधुनिक ढांचा
विकसित भारत के आईने में जो सबसे पहली तस्वीर उभरती है, वह है ‘आत्मनिर्भरता’। बजट में रक्षा, विनिर्माण और तकनीक पर जो जोर दिया गया है, वह बताता है कि भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की राह पर है।
इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़कों, रेलवे और हवाई अड्डों पर रिकॉर्ड निवेश यह सुनिश्चित कर रहा है कि भारत की रफ्तार किसी भी विकसित राष्ट्र से कम न हो।
डिजिटल इंडिया: हर हाथ में तकनीक और हर गांव में इंटरनेट, विकसित भारत के विजन का सबसे मजबूत स्तंभ है।
युवा शक्ति और कौशल विकास: भविष्य का प्रतिबिंब
किसी भी देश की प्रगति उसके युवाओं के कौशल पर टिकी होती है। बजट में शिक्षा और कौशल विकास के लिए किए गए प्रावधान उस आईने की तरह हैं, जो भविष्य की कार्यबल की तस्वीर दिखाते हैं। केवल डिग्री बांटना लक्ष्य नहीं है, बल्कि युवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करना ‘विकसित भारत’ की असली पहचान है।
समावेशी विकास: आईने का दूसरा पहलू
विकसित भारत तब तक अधूरा है जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से न जुड़े। बजट ने इस आईने के दूसरे पहलू को भी साफ किया है:
कृषि में सुधार: नैनो यूरिया और प्राकृतिक खेती जैसे कदम किसानों की आय बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई जान दे रहे हैं।
मध्यम वर्ग को राहत: टैक्स स्लैब में बदलाव और बचत की योजनाओं के जरिए आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
आम आदमी का दृष्टिकोण: “विकसित भारत का आईना यह दिखाता है कि जब देश का हर नागरिक आर्थिक रूप से सशक्त होगा, तभी 2047 का सपना धरातल पर उतरेगा। यह बजट उस सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में एक साहसी कदम है।”


