डर, लालच और आलस्य : साइबर अपराध का शिकार होने के तीन प्रमुख कारण; जागरूकता ही उपाय — पीआईबी भोपाल द्वारा ‘वार्तालाप’ मीडिया वर्कशॉप का आयोजन
प्रविष्टि तिथि: 22 अगस्त 2025, 4:45 PM | स्रोत: PIB भोपाल
क्यों फँसते हैं लोग साइबर अपराध में?
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठगी का शिकार होने के पीछे ज़्यादातर कारण तीन ही होते हैं—
डर (जैसे पुलिस या बैंक का नाम लेकर धमकी देना)
लालच (जैसे इनाम या लॉटरी का झांसा)
आलस्य (जैसे तुरंत जांच न करना और लिंक पर क्लिक कर देना)
अगर इन तीन आदतों पर काबू पा लिया जाए तो साइबर अपराध से आसानी से बचा जा सकता है।
भोपाल वर्कशॉप ‘वार्तालाप’
पत्र सूचना कार्यालय (PIB) भोपाल और राज्य साइबर पुलिस के सहयोग से ‘वार्तालाप’ मीडिया वर्कशॉप आयोजित की गई। इसका उद्देश्य पत्रकारों के माध्यम से आम लोगों तक साइबर सुरक्षा के संदेश को पहुँचाना था।
कार्यक्रम में बताया गया कि 2022 से 2024 के बीच भोपाल के नागरिकों को 104 करोड़ रुपये का नुकसान ऑनलाइन ठगी से हुआ। इसमें से केवल 2% रकम ही वापस मिल पाई।
विशेषज्ञों की सलाह
1. डर पर काबू रखें
साइबर कमांडो श्री अनुज समाधिया ने बताया कि कोई भी कॉल या मैसेज आए जिसमें तुरंत कार्रवाई करने को कहा जाए, तो घबराएँ नहीं। सोच-समझकर कदम उठाएँ।
2. लालच से बचें
अक्सर धोखेबाज लॉटरी, इनाम या निवेश के नाम पर फँसाते हैं। याद रखें—फ्री में कुछ नहीं मिलता।
3. बैंकिंग में सावधानी रखें
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के श्री अरुण पोनप्पन ने कहा कि ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते समय ओटीपी, पासवर्ड या कार्ड डिटेल कभी किसी से साझा न करें।
4. सोशल मीडिया पर अलर्ट रहें
साइबर सुरक्षा प्रशिक्षक श्री अतुल श्रीवास्तव ने समझाया कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहें। किसी भी लिंक या वीडियो को बिना जाँचे-परखे शेयर न करें।
5. तुरंत शिकायत करें
अगर आप किसी साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं तो तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
निष्कर्ष
डिजिटल युग में सुविधा बढ़ी है, लेकिन खतरे भी उतने ही बढ़ गए हैं। थोड़ी सी जागरूकता, सतर्कता और सही समय पर की गई कार्रवाई से हम अपने पैसों और डाटा को सुरक्षित रख सकते हैं।


