प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ।
जनचौपाल36/चौपालसेचौपाटीतक
नई दिल्ली | 26 जनवरी, 2026
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज 77वें गणतंत्र दिवस के गौरवशाली अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने इस दिन को भारत की आन-बान और शान का प्रतीक बताते हुए राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
राष्ट्रीय गौरव और नई ऊर्जा का पर्व
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक शक्तिशाली प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह राष्ट्रीय महापर्व सभी नागरिकों के जीवन में नई ऊर्जा और नए उत्साह का संचार करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र निर्माण के प्रति अपने विजन को साझा करते हुए कहा, “विकसित भारत का संकल्प और अधिक सुदृढ़ हो, यही कामना है। यह अवसर हमें एकजुट होकर राष्ट्र-निर्माण की दिशा में दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।”
संस्कृत सुभाषित के माध्यम से एकता का संदेश।
इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक प्राचीन संस्कृत सुभाषित साझा कर स्वतंत्रता और एकता के महत्व पर प्रकाश डाला:
“पारतन्त्र्याभिभूतस्य देशस्याभ्युदयः कुतः।
अतः स्वातन्त्र्यमाप्तव्यमैक्यं स्वातन्त्र्यसाधनम्॥”
इस श्लोक की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि जो राष्ट्र पराधीन है या अधिकारों से वंचित है, वह कभी प्रगति नहीं कर सकता। इसलिए, प्रगति सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्रता और एकता को ही मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में अपनाना अनिवार्य है।
लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि हमारा संविधान ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी लोकतांत्रिक विरासत को सहेजें और एक आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें।


