आज विश्व जैव ईंधन दिवस है यह दिवस 2015 से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा मनाया जा रहा है।
रायपुर, 10 अगस्त 2025 | Janchoupal 36
हर वर्ष 10 अगस्त को
विश्व जैव ईंधन दिवस
मनाया जाता है, ताकि जैव ईंधन (Biofuel) के महत्व और इसके पर्यावरण, ऊर्जा सुरक्षा तथा आर्थिक विकास में योगदान के प्रति जन_जागरूकता बढ़ाई जा सके। यह दिन 1893 में डीज़ल इंजन के प्रणेता सर रुडोल्फ डीज़ल द्वारा मूंगफली के तेल से पहला इंजन चलाने की याद में मनाया जाता है।
जैव ईंधन क्यों महत्वपूर्ण हैं?
जैव ईंधन, फसल अवशेष, वनस्पति तेल, गन्ने की शीरा, पशु अपशिष्ट और अन्य जैविक स्रोतों से बनाए जाते हैं। ये जीवाश्म ईंधन का विकल्प प्रदान करते हैं और कई फायदे देते हैं—
पर्यावरण अनुकूल – प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी
ऊर्जा सुरक्षा – आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता घटाना
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा – किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर
नवाचार और नई नौकरियां – ग्रीन टेक्नोलॉजी सेक्टर का विकास
भारत में पहल
भारत सरकार ने
राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018
के तहत 2030 तक 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है।
एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है।
गन्ना, मक्का और पराली जैसे स्रोतों से एथेनॉल उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।
कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट्स स्थापित किए जा रहे हैं, जो वाहन ईंधन और बिजली उत्पादन में सहायक हैं।
चुनौतियां और आगे का रास्ता
उत्पादन लागत और बुनियादी ढांचे में सुधार
कच्चे माल की सतत आपूर्ति
किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और प्रोत्साहन
निष्कर्ष जनचौपाल 36.कॉम
विश्व जैव ईंधन दिवस सिर्फ ऊर्जा का नहीं, बल्कि स्वच्छ पर्यावरण, आर्थिक सशक्तिकरण और सतत विकास का संदेश देता है। भारत अगर समयबद्ध और सामूहिक प्रयासों से इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो हम न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करेंगे बल्कि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य भी देंगे।


