विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध की परिस्थितियों में यह समन्वय भारत को निर्णायक बढ़त दिला सकता है, जैसा कि ऑपरेशन सिंदूर में देखा गया था।
नई दिल्ली/ मीडिया सूत्र | 17 अक्टूबर 2025
भारत ने अपनी वायुसेना शक्ति के मोर्चे पर चीन को पीछे छोड़ते हुए एक नई उपलब्धि हासिल की है। वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट (WDMMA) की ताजा वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना (IAF) अब अमेरिका और रूस के बाद दुनिया की तीसरी सबसे ताकतवर वायुसेना बन गई है। यह रैंकिंग केवल विमानों की संख्या पर आधारित नहीं है, बल्कि ट्रेनिंग, तकनीकी दक्षता, और मिशन निष्पादन क्षमता जैसे आयामों को भी शामिल करती है।
रैंकिंग में चीन पीछे, भारत की बढ़ी प्रतिष्ठा
रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन के पास विमान संख्या के मामले में बढ़त होने के बावजूद भारतीय वायुसेना की आधुनिक तकनीक, रणनीति और मिशन तैयारी ने उसे पीछे छोड़ दिया है। भारत की ताकत सटीक हमले, तेज प्रतिक्रिया और अभियान कौशल में है। हाल में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने अपनी इस तैयारी का सफल प्रदर्शन किया, जब पाकिस्तान के कई ठिकानों को निशाना बनाकर वायु क्षेत्र में भारत का दबदबा स्थापित किया गया।
अगर सशक्तिकरण की बात करें तो भारत आगे
WDMMA की रैंकिंग के अनुसार, शीर्ष पांच देशों में अमेरिका (TVR 242.92), रूस (114.23), भारत (69.44), चीन (63.85) और जापान (58.1) शामिल हैं। इस ट्रू-वैल रेटिंग (TVR) प्रणाली के ज़रिए प्रत्येक वायुसेना की वास्तविक युद्ध क्षमता का आकलन किया जाता है। भारत के लिए यह उपलब्धि उसकी रणनीतिक निवेश नीति, स्थानीय रक्षा विनिर्माण और पायलटों की गहन प्रशिक्षण प्रणाली का परिणाम मानी जा रही है।
तीनों सेनाओं में बेहतर तालमेल
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की तीनों सेनाओं — आर्मी, नेवी और एयरफोर्स — के बीच मजबूत तालमेल ही उसकी सफलता का केंद्र है। रूस की तरह सिर्फ हथियारों पर निर्भर रहने के बजाय भारत ने मानव संसाधन और युद्ध प्रबंधन पर निवेश किया है।


