नई दिल्ली/मीडिया खबर/ 30/10/2025
अब मोबाइल पर आने वाली कॉल में कॉल करने वाले व्यक्ति का असली नाम दिखाई देगा। दूरसंचार नियामक ट्राई ने इस सुविधा को लेकर दूरसंचार विभाग के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है। कॉलर नेम डिस्प्ले यानी कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) सुविधा का परीक्षण देश की प्रमुख मोबाइल कंपनियों ने शुरू कर दिया है। उम्मीद है कि यह सेवा मार्च 2026 तक देशभर में लागू हो जाएगी। इसका उद्देश्य फर्जी कॉल, डिजिटल गिरफ्तारी और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी बढ़ती साइबर अपराध गतिविधियों पर रोक लगाना है।
केवल 4जी और 5जी नेटवर्क पर मिलेगी सुविधा
ट्राई के अधिकारियों के अनुसार, सीएनएपी सुविधा केवल 4जी और 5जी नेटवर्क वाले उपभोक्ताओं को ही उपलब्ध हो सकेगी, क्योंकि पुराने 2जी और 3जी नेटवर्क में तकनीकी सीमाएं हैं। सरकार ट्राई की उस सिफारिश पर भी विचार कर रही है जिसके तहत ‘कॉलिंग लाइन पहचान निषेध’ (CLIR) फीचर का उपयोग करने वाले ग्राहकों का नाम प्रदर्शित नहीं किया जाएगा। यह कदम गोपनीयता और सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
मोबाइल कंपनियों ने शुरू किया ट्रायल
ट्राई की हरी झंडी मिलने के बाद मोबाइल कंपनियों ने सीएनएपी फीचर का ट्रायल शुरू कर दिया है। ट्राई की फरवरी 2024 की सिफारिशों के अनुसार, यह सुविधा केवल इच्छुक उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक रूप में दी जानी थी, लेकिन दूरसंचार विभाग चाहता है कि यह सेवा स्वचालित रूप से सभी उपभोक्ताओं के लिए सक्रिय की जाए ताकि यह डिफॉल्ट रूप से काम करे।
छह महीने में अमल की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, अंतिम निर्णय के बाद दूरसंचार विभाग मोबाइल फोन निर्माताओं और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ मिलकर इस सुविधा को छह महीने के भीतर लागू करने की रूपरेखा तैयार करेगा। चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में इसे शुरू किया जाएगा जिससे धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।


