सफलता किस्मत से कहीं ज्यादा,बड़ी सोच और मेहनत से मिलती है।जन चौपाल36/चौपाल से चौपाटी तक
फीचर डेस्क:_ 23/01/2026
अक्सर देखा जाता है कि जब कोई व्यक्ति जीवन में असफल होता है या किसी लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाता, तो वह अपनी किस्मत को दोष देने लगता है। वहीं, जब वह अपने आसपास सफल लोगों को देखता है, तो यही सोचता है कि इनकी किस्मत बहुत अच्छी है, तभी ये अपनी-अपनी फील्ड में ऊँचाइयों तक पहुँचे हैं। लेकिन क्या वाकई सफलता का सीधा संबंध केवल किस्मत से होता है? इस सवाल का जवाब तलाशना बेहद ज़रूरी है।
वास्तविकता यह है कि किस्मत का सहारा वही लोग लेते हैं, जो अपने प्रयासों से बचते हैं। इतिहास और वर्तमान—दोनों ही इस बात के साक्षी हैं कि सफलता उन्हीं को मिलती है, जो निरंतर परिश्रम करते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते। जब कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य को लेकर ईमानदारी से मेहनत करता है, तो उसके विचार सकारात्मक हो जाते हैं। सकारात्मक सोच उसके कर्मों में झलकने लगती है और यही कर्म आगे चलकर उसकी पहचान बन जाते हैं।
जीवन की राह आसान नहीं होती। हर व्यक्ति को संघर्ष, असफलता और निराशा के दौर से गुजरना पड़ता है। लेकिन जो लोग इन चुनौतियों से डरकर रुक जाते हैं, वे पीछे रह जाते हैं, जबकि जो लोग लगातार प्रयास करते रहते हैं, वही आगे बढ़ते हैं। ऐसे लोग संकटों को अवसर में बदलना जानते हैं और हर असफलता से कुछ नया सीखते हैं।
जब कोई व्यक्ति पूरी निष्ठा और लगन से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है, तो एक समय ऐसा आता है जब परिस्थितियाँ भी उसके अनुकूल होने लगती हैं। यही वह क्षण होता है, जिसे लोग ‘किस्मत का साथ देना’ कहते हैं। दरअसल, यह किस्मत नहीं बल्कि लंबे समय की मेहनत का परिणाम होता है।
इस बसंत पंचमी पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपनी असफलताओं का ठीकरा किस्मत पर फोड़ने के बजाय अपने प्रयासों को और मज़बूत बनाएँ। जब भी किसी सफल व्यक्ति से मिलें, तो यह याद रखें कि उसकी सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, त्याग और संघर्ष छिपा होता है—और तब जाकर किस्मत उसका साथ देती है।


