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Saturday, March 7, 2026

2_भाग —वापसी अतीत की ओर ↔️प्रेम और समय के मध्य एक सेतु

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लघु उपन्यास “वापसी अतीत की ओर” का दूसरा भाग प्रस्तुत है। यह अध्याय उन दिनों की स्मृतियों की ओर ले जाएगा, जहाँ अनिमेष और विनीता का पहला साक्षात्कार हुआ था—एक अद्भुत क्षण, जहाँ भविष्य की आशाएं अनजाने रूप में आकार ले रही थीं।

💛(स्थान_पीले फूलों की घाटी)
जैसलमेर के रेगिस्तान की धूप भी उस दिन कुछ कोमल थी, मानो प्रकृति स्वयं किसी आगंतुक के स्वागत में संकोचवश ठहर गई हो।
अनिमेष, जो वर्षों से रेत की लहरों के बीच एक मौन गाइड के रूप में जी रहा था,वैसे दिखने में अनिमेष आकर्षक चेहरा सुडौल कद काठी पढ़ा लिखा खूबसूरत जवान था।लेकिन हालात से किनारा कर आया था कुछ लोग होते हैं जो हालात से टकराते हैं कुछ लोग हालात से टकराने के बजाय अपने आप को किनारा कर लेते हैं उन्हीं में से था एक अनिमेष।🏃🏃
उस दिन पहली बार समय से पहले “सोनार किला” पहुँचा था। उसके भीतर कुछ अज्ञात उत्सुकता थी, जैसे आज कोई विशेष मिलने वाला हो। सोनार किला राजस्थान में रेगिस्तान का स्वर्ण मुकुट कहलाता है देखने में अति सुंदर ।शाम के समय जब सूर्यास्त गामी सूर्य की रोशनी किले पर पड़ती है तो ऐसा लगता है जैसे वहां पूरा स्वर्ण नगरी निकल आई हो क्योंकि संपूर्ण रूप से पीले पत्थरों से बनाया गया अदभुत बहुत प्राचीन किला था । इस ऐतिहासिक किले को देखने विश्व के लोग आते हैं यह किला पीले बलुआ पत्थर से बना है और इसमें चार बड़े प्रवेश द्वार हैं जिन्हें “पोल” कहा जाता है।
🧑‍🌾
अनिमेष ने देख लिया
किला के द्वार पर खड़ी वह लड़की…
गहरी नीली आँखें मासूमियत में लिपटी, आँखों में झीलों सी शांति, और होंठों पर आधा-अधूरा प्रश्न…दिखने में बला की खूबसूरत कश्मीरी वेशभूषा इसे साफ प्रतीत होता है कि वह कश्मीर से ताल्लुकात रखती है।
👰
दोनों की नजरें मिली उस लड़की ने अनिमेष पर एक गहरी नजर डाली जैसे कोई स्त्री किसी पुरुष को नजरों से पढ़ती है फिर उसके चेहरे पर नजर टिकाती बोली__””
“क्या आप ही अनिमेष हैं?”
उसने पूछा।

अनिमेष चौंका।
वह प्रश्न नहीं था—जैसे कोई स्वर पहले ही आत्मा को छू गया हो।
“हाँ, मैं ही हूँ।”
उसके स्वर में एक अनचाही गंभीरता थी।

लड़की मुस्कराई।
“मैं विनीता हूँ… कश्मीर से आई हूँ। आपकी कहानियाँ बहुत सुनी हैं। सोचा खुद सुनूँ, खुद देखूँ…”
🤱🧑‍🍼
“यहीं से आरंभ हुआ वह अद्भुत अध्याय, जहाँ इतिहास और वर्तमान की दहलीज़ पर दो आत्माएँ एक-दूसरे को पढ़ने लगी थीं।
राजस्थान – जो अब अतीत की परछाई बन चुका है, और कश्मीर – जो आज भी वर्तमान की धड़कनों में साँस लेता है।
जब अतीत वर्तमान से मिलता है, तो समय ठहर जाता है, और जब इतिहास स्वयं अतीत से हाथ मिलाता है, तो वह मिलन ऐतिहासिक हो जाता है।
🌼🌼🌼🌼🌼
यह वही क्षण था – दो रूहों के मिलन का, दो खोई हुई आत्माओं की तलाश का, जो एक-दूसरे में खुद को पा रही थीं।”यही ऐतिहासिक मिलन थी दो रूहों की दो खोजती खोई आत्माओं की।
🕌🛕🏘️
उस दिन उन्होंने किले के प्राचीन गलियारों से लेकर रेगिस्तान की थिरकती रेतों तक न जाने कितनी बातें कीं।
विनीता बातों में ठहरती नहीं थी—वह बहती थी, जैसे झरना।
और अनिमेष? वह उसे सुनते-सुनते स्वयं को भूलता जा रहा था।
शाम को जब सूर्य रेत पर सिंदूरी चादर बिछा रहा था, विनीता ने पूछा—
“क्या आप यहाँ हमेशा रहते हैं?”
अनिमेष ने सिर हिलाया।
“हाँ, और शायद हमेशा रह जाऊँ…”
..??
“पर क्यों?”
“क्योंकि अतीत ने मुझे यहीं छोड़ दिया है…”
अनिमेष का उत्तर भारी था।
विनीता थोड़ी देर मौन रही।
फिर मुस्कराकर बोली—
“फिर मैं अतीत को बदलने आई हूँ…”एक शोखी शरारत थी उसमें।

अनिमेष ने पहली बार उसकी आँखों में सीधा देखा।
शायद उसी क्षण कुछ जुड़ गया था—
एक बंधन जो भाषा से परे था,
एक संवाद जो आत्मा से आत्मा तक पहुँचा था।
(क्रमशः…2)


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