बस्तर के जंगलों में अब कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। विस्फोटक सामग्रियों का नष्ट होना न केवल जवानों की जान बचाने वाला साबित हुआ है, बल्कि इलाके के ग्रामीणों में भी सुरक्षा का भाव पैदा हुआ है।
जन चौपाल 36/चौपाल से चौपाटी तक
रायपुर/नारायणपुर _ 02 फरवरी, 2026
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद के खात्मे के लिए तय की गई 31 मार्च 2026 की समयसीमा जैसे-जैसे करीब आ रही है, छत्तीसगढ़ के जंगलों में सुरक्षा बलों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में नारायणपुर पुलिस और आईटीबीपी (ITBP) की संयुक्त टीम ने अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में नक्सलियों के एक बड़े मंसूबे को नाकाम करते हुए भारी मात्रा में विस्फोटक और रसद बरामद की है।
सर्जिकल स्ट्राइक जैसी तैयारी: ‘ऑपरेशन अबूझमाड़’
31 जनवरी 2026 को शुरू हुए इस जॉइंट सर्च ऑपरेशन की कमान 53वीं वाहिनी ITBP के सेनानी संजय कुमार और उप सेनानी तेजवीर सिंह के हाथों में थी। नारायणपुर पुलिस की DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और ITBP के जवानों ने घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में रणनीतिक घेराबंदी की।
बरामद सामाग्री एवं हथियार
📌विस्फोटक और घातक हथियार: भारी मात्रा में जिलेटिन रॉड्स और डेटोनेटर।
📌 IED बरामदगी: एक शक्तिशाली प्रेशर कुकर IED बरामद किया गया, जिसे सुरक्षा बलों के बम निरोधक दस्ते ने मौके पर ही डिफ्यूज कर दिया।
* लॉजिस्टिक्स डंप: रसद (राशन), खाना बनाने के बड़े ड्रम और दैनिक उपयोग का भारी सामान।
नक्सलियों की कमर तोड़ने वाली सफलता
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में राशन और विस्फोटक की बरामदगी का मतलब है कि नक्सली किसी बड़े हमले या लंबे समय तक छिपने की तैयारी में थे। इस ‘डंप’ के पकड़े जाने से नक्सलियों की सप्लाई चेन पूरी तरह टूट गई है।
“छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल उन्मूलन नीति के तहत सुरक्षा बल अब नक्सलियों के सुरक्षित किलों (Safe Havens) में घुसकर प्रहार कर रहे हैं। यह सफलता जवानों के बढ़ते मनोबल और सटीक खुफिया तंत्र का परिणाम है।”— सुरक्षा अधिकारी, नारायणपुर


