नई दिल्ली/ईडी_31/12/2025
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को तगड़ा कदम उठाते हुए पूर्व एक्साइज कमिश्नर निरंजन दास (आईएएस), 30 अन्य एक्साइज अधिकारियों और तीन प्रमुख डिस्टिलरीज की 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त कर लीं।
ED का बड़ा एक्शन
यह कार्रवाई पूर्व कांग्रेस सरकार (2019-2023) के 2,800 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच का हिस्सा है। ईडी का दावा है कि वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिक हस्तियों के आपराधिक सिंडिकेट ने एक्साइज विभाग पर कब्जा जमाया था। जब्त संपत्तियों में 78 रियल एस्टेट प्रॉपर्टी (लग्जरी बंगले, फ्लैट, शॉप, कृषि भूमि) और 197 इनवेस्टमेंट्स (एफडी, बैंक बैलेंस, इंश्योरेंस, शेयर-म्यूचुअल फंड) शामिल हैं।[2][4]
अधिकारियों पर शिकंजा
इनमें 38.21 करोड़ रुपये की संपत्तियां निरंजन दास और 30 अधिकारियों की हैं, जो राज्य राजस्व सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते थे। ईडी ने अधिकारियों की गहरी मिलीभगत उजागर की। दूसरी ओर, 68.16 करोड़ की संपत्तियां छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड, भाटिया वाइन मर्चेंट्स और वेलकम डिस्टिलरीज की हैं।]
सिंडिकेट का खुलासा
ईडी ने 26 दिसंबर को नई चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 81 आरोपी बनाए गए। इनमें पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व एक्साइज मंत्री कवासी लाखमा, पूर्व जॉइंट सेक्रेटरी अनिल तूतेजा, सौम्या चौरसिया और रायपुर मेयर अयाज ढेबर के भाई अनवर शामिल हैं। आरोप है कि दास और अरुण पति त्रिपाठी ने समानांतर एक्साइज सिस्टम चलाया।[6][7]
अवैध कमाई के तरीके
सिंडिकेट ने चार तरीकों से कमाई की: अवैध कमीशन (प्रति केस 140 रुपये), बिना हिसाब बिक्री, कार्टेल कमीशन और एफएल-10ए लाइसेंस से कमीशन। निरंजन दास ने मासिक 50 लाख रिश्वत से 18 करोड़ कमाए। ईडी ने राज्य प्रशासन में साजिश का पर्दाफाश किया।


