सर्व समाज ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
दिनांक : 24 दिसंबर 2025
सर्व समाज छत्तीसगढ़ एवं बस्तर एवं जनजाति सुरक्षा मंच, कांकेर के आह्वान पर आज छत्तीसगढ़ बंद का आयोजन किया गया, जिसे छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, समस्त व्यापारी संगठनों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ। यह बंद किसी एक वर्ग या समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि संविधान, कानून-व्यवस्था और जनजातीय संस्कृति की रक्षा के लिए किया गया है।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में 15 से 18 दिसंबर 2025 के बीच घटित घटनाक्रम अत्यंत गंभीर, संवैधानिक और सामाजिक संतुलन से जुड़ा विषय है। आमाबेड़ा क्षेत्र संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत अधिसूचित जनजातीय क्षेत्र है, जहाँ आदिवासी समाज की परंपराएँ, आस्थाएँ और सांस्कृतिक अधिकार संवैधानिक रूप से संरक्षित हैं।
घटना की पृष्ठभूमि
15 दिसंबर 2025 को बड़ेतेवड़ा गांव निवासी चमरा राम सलाम का निधन कांकेर जिला अस्पताल में हुआ। उसी रात उनके पुत्र रजमन सलाम (वर्तमान सरपंच) द्वारा शव गांव लाया गया। 16 दिसंबर की सुबह गांव में उपसरपंच, मांझी, गायता, सर्व समाज के वरिष्ठजन एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए और परंपरागत जनजातीय रीति से अंतिम संस्कार की सहमति बनी।
इसी दौरान बाहरी तत्वों के रूप में भीम आर्मी से जुड़े कुछ पदाधिकारी एवं कुछ पादरी-पास्टरों की उपस्थिति सामने आई, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई। ग्रामीणों द्वारा स्पष्ट रूप से कहा गया कि श्मशान स्थल जनजातीय परंपरा के अनुसार ही उपयोग में लाया जाएगा।
इसके विपरीत मृतक के पुत्र एवं उसके भाई द्वारा खुले तौर पर धमकी भरी भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे गांव में भय और तनाव का माहौल बना।स्थिति के दौरान मौके पर मौजूद पुलिस बल की उपस्थिति के बावजूद जबरन शव दफनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस दौरान ग्रामीणों के साथ धक्का-मुक्की हुई तथा एक पुलिस जवान के साथ भी हाथापाई की घटना सामने आई। यह घटनाक्रम न केवल सामाजिक सौहार्द, बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
सर्व समाज का आक्रोश और शांतिपूर्ण विरोध
इसी के विरोध में आज बेमेतरा सहित प्रदेशभर में सर्व समाज द्वारा शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया। धरने में विजय सिन्हा पालिका अध्यक्ष,जितेंद्र शुक्ला, प्रीतपाल सिंह,दीपक पाण्डेय,महेश शर्मा,आशीष तिवारी, नारद साहू साहू समाज जिलाध्यक्ष,नीलू राजपूत, जितेंद्र यदु, रीना देवी साहू, होरीलाल सिन्हा, अरुण राठी,विकास तंबोली, पोषण वर्मा, परमेश्वर वर्मा, लालाराम साहू सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह विषय किसी एक धर्म या व्यक्ति का नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, सनातन परंपरा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का है। यदि समय रहते इस पर गंभीर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसी घटनाएँ सामाजिक ताने-बाने को गहरा नुकसान पहुँचा सकती हैं।


